बीजेसपी राज्य अध्यक्ष पी.वी.एन. माधव ने कहा कि आधार‑संलग्न बिजली कनेक्शन में तकनीकी खामियों के कारण कई पात्र नागरिकों को सामाजिक कल्याण, पेंशन और सब्सिडी वाली बिजली से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए राज्यव्यापी ऑडिट की माँग की है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- आधार‑विद्युत कनेक्शन में बड़ी त्रुटि, कई लाभार्थी प्रभावित
- बीजेसपी राज्य अध्यक्ष ने राज्यव्यापी ऑडिट की माँग की
- सुधार हेतु डिजिटल सत्यापन प्रणाली, जिला‑स्तरीय अधिकारी और एआरओ में रिक्तियों को भरने की आवश्यकता
आंध्र प्रदेश के बीजेसपी राज्य अध्यक्ष पी.वी.एन. माधव ने सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि सरकारी आधार‑संलग्न बिजली कनेक्शन में तकनीकी और प्रशासनिक त्रुटियों के कारण हजारों पात्र नागरिकों को पेंशन, कल्याण योजनाएँ और सब्सिडी वाली बिजली से वंचित किया जा रहा है। यह मुद्दा बीजेसपी के “जनता वरद्धी” अभियान के दौरान प्रमुख शिकायतों में से एक बन गया था।
पृष्ठभूमि और समस्या की जड़
आधार को विभिन्न सरकारी योजनाओं में पहचान उपकरण के रूप में उपयोग किया जाता है, जिससे लाभार्थियों को सीधे लाभ पहुंचाना आसान हो जाता है। हालांकि, जब आधार‑आधारित electricity service connections (ESC) को एक ही आधार नंबर से जोड़ दिया जाता है, तो वास्तविक लाभार्थियों का डेटा आपस में मिल जाता है। इस कारण कई बार किसी एक व्यक्ति के नाम पर कई कनेक्शन जुड़ जाते हैं, जबकि अन्य को उनके ही नाम पर कनेक्शन नहीं मिल पाते।
प्रभावित वर्ग और सामाजिक प्रभाव
माधव ने विशेष रूप से जलकृषि (एक्वा) किसान, नाई, सुनार, बढ़ई और आर्थिक रूप से कमजोर बीसी, एससी, एसटी वर्ग के लोगों का उल्लेख किया। इन समूहों की आय का बड़ा हिस्सा सरकारी सब्सिडी और पेंशन पर निर्भर करता है; इसलिए किसी भी कनेक्शन त्रुटि का सीधा असर उनके जीवनस्तर पर पड़ता है।
सरकारी प्रतिक्रिया और प्रस्तावित समाधान
ब्यौरा के अनुसार, कई बार प्रभावित उपयोगकर्ताओं को अन्य उपयोगकर्ताओं के आधार विवरण देने के लिए कहा गया, जिससे समस्या और बढ़ गई। माधव ने कहा कि सुधार का दायित्व पूरी तरह से सरकार पर है। उन्होंने एक व्यापक राज्यव्यापी ऑडिट, विशेष ड्राइव द्वारा असंगतियों की पहचान, जिला‑स्तरीय नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, इलेक्ट्रिकल रिवेन्यू ऑफिस (ERO) में रिक्तियों को भरने और एक डिजिटल सत्यापन प्रणाली लागू करने की माँग की।
भविष्य की दिशा
यदि इन कदमों को तुरंत लागू किया गया, तो न केवल आधार‑विद्युत लिंकिंग की शुद्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि सामाजिक सुरक्षा जाल में सुधार भी होगा। यह पहल आंध्र प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस के एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखी जा सकती है, जिससे अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल स्थापित हो सकता है।