ऊर्जा एवं पर्यटन मंत्री के.जे. जॉर्ज ने राज्य के 13 प्रमुख पर्यटन स्थलों में रोपवे परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया। सभी परियोजनाओं की व्यवहार्यता अध्ययन राइल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस (RITES) को सौंपा गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • राज्य के 13 प्रमुख पर्यटन स्थलों में रोपवे परियोजनाओं को तेज़ी से लागू किया जाएगा।
  • व्यवहार्यता अध्ययन RITES को सौंपे गए; आठ रिपोर्ट पहले ही तैयार हैं।
  • परियोजनाओं को PPP मॉडल पर आधारित किया जाएगा, जिससे निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

कर्नाटक के ऊर्जा एवं पर्यटन मंत्री के.जे. जॉर्ज ने पर्यटन विभाग के अधिकारियों को 13 रोपवे परियोजनाओं को तेज़ी से कार्यान्वित करने का निर्देश दिया। यह निर्देश बेंगलुरु में सोमवार को आयोजित एक समीक्षात्मक बैठक में दिया गया, जहाँ मंत्री ने कहा कि कई रोपवे प्रोजेक्ट्स कई सालों से योजना चरण में फंसे हुए हैं और अब इन्हें शीघ्रता से आगे बढ़ाना आवश्यक है।

प्रोजेक्ट्स की वर्तमान स्थिति

राज्य ने इन 13 रोपवे परियोजनाओं की व्यवहार्यता अध्ययन राइल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस (RITES) को सौंप दी है। अब तक आठ परियोजनाओं के विस्तृत अध्ययन तैयार हो चुके हैं, जबकि शेष पाँच के लिए अनुमोदन प्रक्रिया में देरी का सामना किया जा रहा है। विशेष रूप से, मुल्लायनागिरी के रोपवे प्रोजेक्ट में पर्यावरण एवं वन विभाग की आवश्यक अनुमतियों के अभाव के कारण अध्ययन में बाधा आई है।

पर्यटन और पर्यावरणीय पहलू

इन रोपवे परियोजनाओं का लक्ष्य कर्नाटक के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और इको‑टूरिज़्म स्थलों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करना है। गोकाक जलप्रपात, मलालिसा मंदिर, अनजानद्री पहाड़ आदि जैसे स्थल पर्यटकों के लिये आकर्षण का केंद्र हैं, और रोपवे के माध्यम से यात्रियों को पर्यावरण‑अनुकूल परिवहन विकल्प मिलेगा। मंत्री ने कहा कि यह पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन को घटाकर सतत बुनियादी ढाँचे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

PPP मॉडल और वित्तीय पहल

इन प्रोजेक्ट्स को सार्वजनिक‑निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत लागू किया जाएगा, जिससे निजी निवेशकों को आकर्षित किया जा सकेगा। वित्त विभाग ने गोकाक रोपवे प्रोजेक्ट के लिये आर्थिक मंजूरी प्रदान कर दी है, जिससे इस परियोजना की गति में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है। इस मॉडल के तहत, राज्य सरकार बुनियादी ढाँचा और नियामक समर्थन प्रदान करेगी, जबकि निजी क्षेत्र तकनीकी और वित्तीय संसाधन जुटाएगा।

भविष्य की दिशा

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी आवश्यक वन, पर्यावरण और अन्य नियामक अनुमतियों को पहले ही प्राप्त किया जाना चाहिए, ताकि टेंडर जारी होने के बाद कोई देरी न हो। यह कदम न केवल परियोजनाओं के समय‑सीमा को सख्त करेगा, बल्कि कर्नाटक को भारत के प्रमुख इको‑टूरिज़्म गंतव्य के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगा।