पिम्प्री‑चिंचवड में कचरा‑से‑ऊर्जा परियोजना के ढहने से नौ कर्मियों की मौत हुई। राज्य सरकार ने दो‑महीने में रिपोर्ट देने के आदेश के साथ एक उच्च‑स्तरीय जांच समिति गठित की।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- पिम्प्री‑चिंचवड में कचरा‑से‑ऊर्जा साइट पर 8 जुलाई को ढहाव, 9 कर्मचारियों की मौत।
- महाराष्ट्र सरकार ने पुणे डिविजनल कमिश्नर शीतल तेली‑उगल को अध्यक्षता में हाई‑लेवल समिति बनायी।
- समिति को तकनीकी, प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं की जाँच, जिम्मेदारी तय करने और सुधारात्मक उपाय सुझाने का आदेश।
8 जुलाई 2026 को पिम्प्री‑चिंचवड नगर निगम (पीसीएमसी) के मोशी कचरा‑डिपो में भारी वर्षा के कारण एक विशाल कचरा ढेर (सैनीटरी लैंडफ़िल) अचानक गिरा, जिससे प्रशासनिक भवन पर धक्का लगा और नौ कर्मियों की जान गई। इस त्रासदी ने न केवल स्थानीय समुदाय को शोक में डुबो दिया, बल्कि कचरा‑से‑ऊर्जा (WtE) परियोजनाओं की सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल उठाए।
सरकारी प्रतिक्रिया और समिति का गठन
घटना के पाँच दिन बाद, महाराष्ट्र की शहरी विकास विभाग ने एक हाई‑लेवल जांच समिति बनाने का आदेश दिया। इस समिति का नेतृत्व पुणे डिविजनल कमिश्नर शीतल तेली‑उगल करेंगे, जो अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे। सदस्यत्व में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) के रीजनल अधिकारी, IIT बॉम्बे से भू‑तकनीकी एवं संरचनात्मक इंजीनियरिंग विशेषज्ञ प्रो. डी.एन. सिंह, तथा पर्यावरण एवं ठोस कचरा प्रबंधन विशेषज्ञ प्रो. अनिलकुमार दीक्षित शामिल हैं। प्रारम्भिक आदेश में पीसीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त विकrant बागड़े का नाम भी था, पर बाद में उसे हटा दिया गया।
जाँच के दायरे और समय‑सीमा
समिति को एक महीने के भीतर प्रारम्भिक रिपोर्ट और दो महीने में अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट में उन्हें तुरंत कारण, मूल कारण विश्लेषण, तकनीकी मानकों के अनुपालन, लैंडफ़िल की ऊँचाई, ढलान, स्थिरता, भंडारण विधि, सुरक्षा उपाय एवं प्रशासनिक भवन की संरचनात्मक स्थिरता की जांच करनी होगी। साथ ही, 2016 के ठोस कचरा प्रबंधन नियम, CPCB/MPCB दिशानिर्देश, CPHEEO मानदंड और संबंधित पर्यावरणीय मंजूरी की भी समीक्षा करनी होगी।
शक्तियाँ और अपेक्षित परिणाम
समिति को सभी दस्तावेज़, ई‑मेल, व्हाट्सएप संदेश, फोटो, ड्रोन सर्वे, सीसीटीवी फुटेज आदि की जांच करने का अधिकार है। उन्हें साइट निरीक्षण, स्वतंत्र तकनीकी जांच, गवाहों और विशेषज्ञों को समन करने तथा आवश्यकतानुसार सैंपलिंग या मापन करने की शक्ति भी दी गई है। अंतिम रिपोर्ट में जिम्मेदारी तय करने, प्रशासनिक लापरवाही या तकनीकी चूक के लिए अनुशासनात्मक या आपराधिक कार्रवाई की सिफ़ारिश, तथा भविष्य में समान हादसे रोकने के लिए अल्प‑कालिक और दीर्घ‑कालिक कार्य‑योजना प्रस्तुत करने का आदेश है।
भविष्य की नीति पर प्रभाव
यह जांच न केवल पीसीएमसी के वर्तमान WtE प्रोजेक्ट की सुरक्षा का मूल्यांकन करेगी, बल्कि महाराष्ट्र में ठोस कचरा प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन के लिए नियामक ढाँचे को पुनः देखेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समिति सख्त अनुशासन और तकनीकी सुधार सुझाती है, तो यह भारत में कचरा‑से‑ऊर्जा मॉडल के लिए एक मील का पत्थर बन सकता है।