हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट (HUD) ने अपने विभागीय दक्षता इकाई (DOGE) द्वारा AI‑आधारित नीति‑निर्धारण के दस्तावेज़ों को FOIA अनुरोध पर ‘अस्तित्वहीन AI विशेषाधिकार’ के आधार पर रोक दिया है। इस कदम से सरकारी पारदर्शिता और AI के नियामक उपयोग पर गंभीर सवाल उठते हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • HUD ने AI‑सहायता वाली नीति‑निर्धारण के 100 से अधिक दस्तावेज़ों को FOIA के तहत रोक दिया।
  • रोक के कारणों में एक ‘अस्तित्वहीन AI विशेषाधिकार’ और राष्ट्रपति‑संचार विशेषाधिकार शामिल हैं।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि AI के उपयोग में पारदर्शिता न होने से नीति‑निर्माण में पक्षपात और त्रुटियों की संभावना बढ़ती है।

हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट (HUD) के भीतर स्थित डिपार्टमेंट ऑफ़ गवर्नमेंट इफ़िशिएंसी (DOGE) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को नीति‑निर्धारण के उपकरण के रूप में अपनाया, लेकिन इस प्रयोग से जुड़े दस्तावेज़ों को सार्वजनिक सूचना अधिकार (FOIA) अनुरोध पर सरकार ने रोक दिया। इस रोक का प्रमुख कारण एक ‘AI विशेषाधिकार’ का हवाला है, जो कानूनी रूप से अस्तित्व में नहीं है, तथा राष्ट्रपति‑संचार विशेषाधिकार, जो सामान्यतः राष्ट्रपति और उनके निकटतम सलाहकारों तक सीमित रहता है।

पृष्ठभूमि और प्रमुख प्रतिभागी

पिछले वर्ष WIRED ने बताया था कि शिकागो विश्वविद्यालय के छात्र क्रिस्टोफ़र स्वीट और प्रॉपर्टी‑टेक स्टार्ट‑अप Kukun के पूर्व कर्मचारी स्कॉट लैंगमैक ने HUD के DOGE टीम में शामिल होकर AI‑आधारित नियम‑समीक्षा पर काम किया। उनका लक्ष्य एजेंसी के नियमों में संभावित निरसन या अनुबंध रद्दीकरण की पहचान करना था, जिससे व्यापक सरकारी स्तर पर समान प्रयासों को तेज किया जा सके। SWEET ने आर्थिक शास्त्र में स्नातक किया, जबकि लैंगमैक अब ओफ़िस ऑफ़ मैनेजमेंट एंड बज़ट (OMB) में ‘डीरगुलेशन AI’ के कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।

FOIA अनुरोध और दस्तावेज़ों की रोक

‘डेमोक्रेसी फॉरवर्ड’ नामक गैर‑लाभकारी कानूनी संस्था ने HUD की AI‑आधारित नीति‑निर्धारण पर 100 से अधिक दस्तावेज़ों की मांग की। इनमें “GPT defined Econ Analysis approach 11 10 25.docx” और “RegulatoryAnalysisPrompt.pdf” जैसे फ़ाइलें शामिल थीं, जिन्हें ‘deliberative AI input’ या ‘AI prompt’ के रूप में वर्गीकृत कर FOIA से बाहर रखा गया। अधिकांश दस्तावेज़ ‘Exemption 5’ (deliberative process privilege) के तहत छिपाए गए, जिससे यह संकेत मिलता है कि ये सामग्री नीति‑निर्माण के पूर्व‑निर्णय चरण में उपयोग हुई थी।

विशेषज्ञों की चेतावनी और नियामक अंतराल

इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन की स्टाफ एटर्नी टोरी नॉबेल ने कहा कि AI‑आधारित उपकरणों के ‘हैलुसिनेशन’, पक्षपात और त्रुटियों की संभावना के कारण पारदर्शिता न होना खतरे को बढ़ाता है। हार्वर्ड के केनेडी स्कूल के लेक्चरर मार्क फेगन ने कहा कि जब तक AI को नीति‑निर्धारण के टूलकिट में शामिल किया जाता है, उपयोग की प्रकृति को स्पष्ट रूप से दर्शाना चाहिए, ताकि सार्वजनिक भरोसा बना रहे। वर्तमान में यू.एस. में कोई कानून नहीं है जो सरकार को AI‑उपयोग की घोषणा करने के लिए बाध्य करता हो।

भविष्य की संभावनाएँ और निष्कर्ष

डॉक्यूमेंटेशन की कमी और ‘अस्तित्वहीन AI विशेषाधिकार’ के हवाले से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी एजेंसियों में AI के नियामक उपयोग पर एक स्पष्ट कानूनी ढांचा अभी भी विकसित नहीं हुआ है। यदि भविष्य में AI‑सहायता वाली नीति‑निर्धारण को आधिकारिक तौर पर अपनाया जाता है, तो पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक विश्वास को बनाए रखने के लिये नई FOIA‑आधारित दिशानिर्देशों की आवश्यकता होगी।