दक्षिण कन्नड़ के सांसद कैप्टन बृजेश चौटा ने लोकसभा में पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य लाभ सुनिश्चित करने के लिए ECHS क्लेम निपटान प्रक्रिया में सुधार की मांग की है। उन्होंने अस्पतालों को हो रही वित्तीय समस्याओं और बुजुर्ग लाभार्थियों को होने वाली परेशानियों का मुद्दा उठाया।

मुख्य बातें

  • सांसद कैप्टन चौटा ने ECHS क्लेम निपटान के लिए एक समयबद्ध प्रणाली की मांग की है।
  • अस्पतालों को बिलों के भुगतान में देरी के कारण वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है।
  • पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को कैशलेस उपचार में बाधा आ रही है।
  • पारदर्शिता के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक डैशबोर्ड प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया गया है।

दक्षिण कन्नड़ के सांसद कैप्टन बृजेश चौटा ने मंगलवार को लोकसभा में 'नियम 377' के तहत रक्षा मंत्रालय से आग्रह किया कि वह एक्स-सर्विसमेन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) के तहत पंजीकृत अस्पतालों के दावों के निपटान के लिए एक स्थायी और समयबद्ध तंत्र विकसित करे।

कैप्टन चौटा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में अस्पतालों द्वारा प्रस्तुत प्रतिपूर्ति (reimbursement) दावों को समय पर निपटाया नहीं जा रहा है, जिससे वे लंबे समय से लंबित हैं। उन्होंने बताया कि बिना किसी ठोस कारण के बार-बार अनावश्यक जानकारी मांगी जा रही है, जिससे अस्पतालों को गंभीर वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप, कई अस्पताल इस योजना से बाहर निकल रहे हैं या सेवाओं को सीमित कर रहे हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, ECHS के तहत दावों में देरी का सीधा असर देश के उन योद्धाओं पर पड़ता है जिन्होंने सीमाओं पर सेवा दी है। यदि अस्पताल वित्तीय संकट के कारण सेवाओं को वापस लेते हैं, तो बुजुर्ग पूर्व सैनिकों को इलाज के लिए दूरदराज के शहरों की यात्रा करनी पड़ती है या अपनी जेब से भारी खर्च करना पड़ता है, जो उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा के विरुद्ध है।

पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक पारदर्शी और डिजिटल क्लेम सिस्टम अनिवार्य है।

सांसद ने मंत्रालय से मांग की है कि दावों के सत्यापन, मेडिकल ऑडिट और अंतिम भुगतान के लिए एक स्पष्ट समयसीमा तय की जाए। उन्होंने एक इलेक्ट्रॉनिक डैशबोर्ड पेश करने का भी सुझाव दिया ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और अस्पतालों को बार-बार एक ही दावे पर आपत्ति न उठानी पड़े।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ECHS का उद्देश्य पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करना है। यह प्रणाली एक नेटवर्क पर आधारित है जहाँ निजी और सरकारी अस्पताल पंजीकृत होते हैं। हालांकि, प्रशासनिक देरी और ऑडिट प्रक्रियाओं के कारण अक्सर बिलों के भुगतान में महीनों लग जाते हैं, जिससे सेवा प्रदाताओं और लाभार्थियों दोनों के बीच तनाव पैदा होता है।

क्या आप जानते हैं?: दक्षिण कन्नड़ जिले में लगभग 5,980 ECHS लाभार्थी हैं, जिनमें पूर्व सैनिक और उनके आश्रित शामिल हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. कैप्टन चौटा ने मुख्य रूप से क्या मांग की है?
उन्होंने ECHS के तहत अस्पतालों के बिलों के भुगतान के लिए एक स्थायी और समयबद्ध प्रक्रिया बनाने की मांग की है।

2. दावों में देरी का पूर्व सैनिकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
देरी के कारण अस्पताल सेवाओं को बंद कर सकते हैं, जिससे पूर्व सैनिकों को इलाज के लिए भटकना पड़ता है या खुद पैसा खर्च करना पड़ता है।