उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में सार्वजनिक कार्य विभाग की सड़क चौड़ाई परियोजना के दौरान 200‑साल पुरानी काली मंदिर का गुंबद ढह गया। दो निजी ठेकेदार के कर्मचारी घायल हुए, जिनमें से एक की मौत हो गई। यह घटना प्रशासनिक चूक और सुरक्षा मानदंडों की गंभीर कमी को उजागर करती है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- लगभग 200‑साल पुराना काली मंदिर का गुंबद गिरा, एक कामगार की मौत, दूसरा घायल
- ध्वस्त कार्य सार्वजनिक कार्य विभाग (PWD) के चौड़ाई प्रोजेक्ट के तहत बिना स्थानीय प्रशासन को सूचित किए किया गया
- स्थानीय अधिकारियों ने घटनास्थल पर तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और जांच का आदेश दिया
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के मुगलसराय शहर में सार्वजनिक कार्य विभाग (PWD) द्वारा चलाए जा रहे सड़क चौड़ाई कार्य के दौरान एक 200‑साल पुराना काली मंदिर ध्वस्त हो गया। इस दुर्घटना में 45 वर्षीय स्थानीय निवासी बलदेव यादव की मृत्यु और एक और कामगार को गंभीर चोटें आईं। दोनों ही निजी ठेकेदार के कर्मचारी थे, जिन्हें PWD ने इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए नियुक्त किया था।
पृष्ठभूमि और परियोजना विवरण
यह सड़क विस्तार परियोजना पिछले चार महीनों से चल रही है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग को चौड़ा कर स्थानीय यातायात को सुगम बनाना है। योजना के अनुसार, प्रस्तावित नई लेन के मार्ग में स्थित कई पुरानी इमारतों को हटाया जाना था, जिनमें इस काली मंदिर का गुंबद भी शामिल था। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और पुलिस को किसी भी पूर्व सूचना के बिना कार्य शुरू किया गया, जिससे सुरक्षा मानकों पर सवाल उठे।
घटना का क्रम
रात के समय, ठेकेदार ने बुलडोजर का उपयोग करके मंदिर के गुंबद को तोड़ना शुरू किया। जब बुलडोजर के बकेट को गुंबद ने टक्कर दी, तो गुंबद नीचे गिरते हुए बलदेव यादव और उनके साथ खड़े एक अन्य कामगार पर गिरा। दोनों को मलबे में दबा दिया गया, जिससे तुरंत ही साइट पर हड़कंप मचा। स्थानीय लोग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुँचे और बचाव कार्य शुरू किया।
प्रतिक्रिया और जांच
चंदौली जिला मजिस्ट्रेट चंद्र मोहन गर्ग ने PWD अधिकारियों को बुलाकर दुर्घटना के कारणों की जांच का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यवाही से पहले स्थानीय प्रशासन, पुलिस और मंदिर समिति को सूचित करना अनिवार्य था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नई मंदिर का निर्माण और पुजारियों का पुनर्स्थापन पहले ही किया जा चुका था, और पुरानी इमारत को हटाने से पहले सभी आवश्यक अनुमति ली गई थी, परंतु यह प्रक्रिया औपचारिक रूप से दर्ज नहीं हुई।
भविष्य की दिशा
इस घटना ने सार्वजनिक कार्यों में सुरक्षा प्रोटोकॉल और सामुदायिक सहभागिता की आवश्यकता को दोबारा रेखांकित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी परियोजनाओं में स्थानीय समुदाय, धार्मिक संस्थाओं और प्रशासनिक निकायों के बीच समन्वय को सुदृढ़ किया जाना चाहिए, ताकि समान त्रासदी दोहराई न जा सके।