पूर्व अंतरराष्ट्रीय तेज़ गेंदबाज़ इरफ़ान पाथान ने भारतीय क्रिकेट टीम में दाहिने‑हाथ के विकल्पों की कमी को लेकर रियान पराग और राजत पाटीदार को चयनित करने की सिफ़ारिश की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि नई पीढ़ी को लगातार पाँच‑छह मैचों का अवसर देना आवश्यक है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- इंटरनेशनल स्तर पर दाहिने‑हाथ के बल्लेबाज़ों की कमी को पाथान ने उजागर किया।
- रियान पराग और राजत पाटीदार को संभावित विकल्प के रूप में सुझाया गया।
- नए खिलाड़ियों को लगातार 5‑6 मैचों का मौका देना चाहिए, जैसा कि वैभव सूर्यवंशी के साथ हुआ था।
पूर्व भारतीय तेज़ गेंदबाज़ इरफ़ान पाथान ने अपने यूट्यूब चैनल पर खुलकर कहा कि भारतीय टीम में दाहिने‑हाथ के बल्लेबाज़ों की अनुपस्थिति एक रणनीतिक कमजोरी बन गई है। पिछले कई सीज़न में शीर्ष सात में बाएँ‑हाथ के खिलाड़ी अधिकतम थे, जिससे बल्लेबाज़ी में एकरूपता आई और विविधता की कमी महसूस हुई।
दाहिने‑हाथ के विकल्पों की आवश्यकता
संजु सैमसन के दौर में शीर्ष तीन में केवल एक दाहिने‑हाथ था, जबकि अन्य खिलाड़ी जैसे अभिषेक शर्मा, इशान किशन और वैभव सूर्यवंशी बाएँ‑हाथ थे। पाथान ने कहा, “यदि टॉप सात में सभी बाएँ‑हाथ हैं, तो दाहिने‑हाथ खोजने और तैयार करने की ज़रूरत है।” इस संदर्भ में उन्होंने राजत पाटीदार और रियान पराग को संभावित विकल्प के रूप में सुझाया।
रियान पराग की दोहरी भूमिका
पराग न केवल दाहिने‑हाथ के बल्लेबाज़ हैं, बल्कि वे अतिरिक्त ओवर देने वाले पाचवें गेंदबाज़ के रूप में भी काम कर सकते हैं। पाथान ने कहा, “यदि वह घरेलू और A‑मैचों में अच्छा प्रदर्शन करता है, तो उसे टीम में शामिल करना चाहिए; वह छठे गेंदबाज़ के रूप में दो ओवर दे सकता है।” इस बहु‑कौशल को भारतीय टीम की बैलेंसिंग में महत्वपूर्ण माना गया।
नए खिलाड़ियों को निरंतर मौका
पाथान ने वैभव सूर्यवंशी के मामले का हवाला देते हुए कहा कि “नए खिलाड़ियों को पाँच‑छह मैचों का निरंतर मौका देना चाहिए, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने आप को स्थापित कर सकें।” उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट को धैर्य रखना चाहिए और युवा प्रतिभा को लम्बी अवधि तक भरोसा देना चाहिए।
खेल की मानसिकता में बदलाव की ज़रूरत
आखिरकार पाथान ने भारतीय क्रिकेट की मौजूदा मानसिकता पर भी टिप्पणी की। “बहुत सारे खिलाड़ी केवल फ्लैट पिच और रेंज‑हिटिंग पर फोकस करते हैं, जबकि गति वाले बॉल्स और कौशल विकास को नजरअंदाज किया जाता है।” उन्होंने कहा कि कोच, चयनकर्ता और खिलाड़ी मिलकर इस दृष्टिकोण को बदलें, तभी भारतीय क्रिकेट की स्थायी सफलता संभव होगी।