फ़ीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने 2030 पुरुष विश्व कप में टीमों की संख्या 64 करने की संभावना पर संकेत दिए। यह प्रस्ताव 2026 टुर्नामेंट के बाद आधिकारिक तौर पर चर्चा का विषय बनेगा, जबकि स्पेन, पुर्तगाल और मोरक्को इस ऐतिहासिक संस्करण की मेजबानी करेंगे।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • इन्फेंटिनो ने 2030 में 64 टीमों के विस्तार का संकेत दिया
  • निर्णय 2026 विश्व कप के बाद लीगा द्वारा तय किया जाएगा
  • विस्तार से नई राष्ट्रों को अवसर और वैश्विक फुटबॉल विकास को बढ़ावा मिलेगा

फ़ीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने 13 जुलाई को न्यू दिल्ली में आयोजित एक साक्षात्कार में बताया कि 2026 में 48‑टीमों वाले प्रारूप की सफलता को देखते हुए 2030 विश्व कप में टीमों की संख्या 64 करने की संभावना पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इन्फेंटिनो ने कहा कि 2026 में कई नई राष्ट्रों को विश्व कप में जगह मिली, जिससे खेल का वैश्विक विस्तार तेज़ हुआ।

इतिहास और पूर्व प्रसंग

पहला फ़ीफा विश्व कप 1930 में आयोजित हुआ था, जब केवल 13 टीमें भाग ले सकीं। तब से टूर्नामेंट ने कई चरणों में विस्तार किया, 1998 में 32 टीमों तक पहुँच गया और 2026 में 48 टीमों का नया प्रारूप लागू हुआ। 48‑टीमों वाला फॉर्मेट यूरोपीय और दक्षिण अमेरिकी क्वालीफ़िकेशन में नई देशों को अवसर प्रदान करने के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी बढ़ाया।

विस्तार के संभावित लाभ

यदि 64 टीमों का प्रस्ताव लागू होता है, तो यह विश्व कप के इतिहास में सबसे बड़ा संस्करण बन जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छोटे देशों को बड़े मंच पर खेलने का मौका मिलेगा, फुटबॉल की लोकप्रियता में वृद्धि होगी, और प्रायोजकों तथा होस्ट देशों के लिए राजस्व संभावनाएँ बढ़ेंगी। साथ ही, अधिक मैचों से स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में पर्यटन और बुनियादी ढाँचे का विकास तेज़ होगा।

चुनौतियाँ और आलोचना

विरोधी पक्ष का तर्क है कि टीमों की संख्या बढ़ाने से टूर्नामेंट की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है, क्योंकि प्रतिभा का वितरण अधिक हो जाएगा। अतिरिक्त मैचों से खिलाड़ियों पर शारीरिक दबाव बढ़ेगा और आयोजकों को लॉजिस्टिक जटिलताओं का सामना करना पड़ेगा। इस कारण, कई फुटबॉल विश्लेषकों ने कहा है कि विस्तार के साथ-साथ क्वालीफ़िकेशन मानदंडों को सख्त करना आवश्यक होगा।

अंत में, इन्फेंटिनो ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय 2026 विश्व कप के समाप्ति के बाद लीगा द्वारा लिया जाएगा, जिससे सभी हितधारकों को अपनी राय व्यक्त करने का पर्याप्त समय मिलेगा। इस निर्णय का प्रभाव न केवल खेल पर, बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक और आर्थिक परिदृश्य पर भी पड़ेगा।