झारखंड सरकार ने स्वास्थ्य, कृषि और खनन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लागू करने के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश किया है। अगले पांच वर्षों में ₹1,150 करोड़ के निवेश के साथ राज्य डिजिटल शासन की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है।
झारखंड सरकार ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक बनाने और सार्वजनिक सेवाओं में दक्षता लाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। नई दिल्ली में आयोजित 'नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन 2026' के दौरान, राज्य सरकार ने झारखंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नीति 2026-2031 का प्रस्ताव रखा। इस महत्वाकांक्षी नीति का मुख्य उद्देश्य शासन के विभिन्न स्तंभों में AI तकनीक का एकीकरण करना है।
विशाल निवेश और बुनियादी ढांचा
इस डिजिटल परिवर्तन को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार ने आगामी पांच वर्षों में ₹1,150 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव दिया है। इस धनराशि का उपयोग AI बुनियादी ढांचे के निर्माण, डिजिटल क्षमताओं को मजबूत करने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य न केवल तकनीक को अपनाना है, बल्कि राज्य के विभिन्न विभागों में एक सुदृढ़ डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) विकसित करना है।
प्रमुख पहल: CM-DIP और डेटा इंटेलिजेंस
इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मुख्यमंत्री डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (CM-DIP) है। यह एक AI-सक्षम प्रणाली होगी जो सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं की वास्तविक समय (Real-time) में निगरानी करेगी। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 'हेल्थ एंड न्यूट्रिशन विजिलेंस सिस्टम' (HNVS) और खनिज प्रशासन को आधुनिक बनाने के लिए 'क्रिटिकल मिनरल्स एडमिनिस्ट्रेशन सिस्टम' (CMAS) जैसे इंटेलिजेंट डेटा एनालिटिक्स टूल्स तैयार किए गए हैं।
आर्थिक प्रभाव और भविष्य की दृष्टि
झारखंड की यह पहल केवल प्रशासनिक सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक गहरा आर्थिक उद्देश्य भी है। राज्य सरकार का लक्ष्य खनन और खनिज प्रशासन में सुधार के माध्यम से 2050 तक ₹10,000 करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित करना है। इस दिशा में एक बड़ी प्रगति के रूप में, सरकार ने हाल ही में प्रस्तावित ₹99,639 करोड़ के मूल्य के 14 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो राज्य के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखते हैं।