उत्त प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने दान चोरी को रोकने के लिए AI‑आधारित निगरानी प्रणाली की सिफारिश की। यह कदम मंदिर में पारदर्शिता बढ़ाने और भविष्य में चोरी को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- AI‑आधारित निगरानी प्रणाली को SIT की अंतिम रिपोर्ट में प्रमुख सिफारिश माना गया है।
- पिछले 40 दिनों में 70 बार दान चोरी की घटनाएँ दर्ज हुईं, कुल लगभग 8 करोड़ रुपये का नुकसान।
- त्रस्त बैंकिंग व्यवस्था, सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव और कई कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया।
उत्तरी प्रदेश सरकार ने 13 जून को आयोध्या राम मंदिर में दान चोरी की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। दो हफ्ते बाद, टीम ने प्रारम्भिक रिपोर्ट में 40 दिनों में 70 चोरी की घटनाओं को उजागर किया, जिसमें लगभग 80 लाख रुपये नकद और कुछ गहने बरामद हुए। इस रिपोर्ट के आधार पर, टीम ने आगामी अंतिम रिपोर्ट में AI‑संचालित निगरानी प्रणाली को प्रमुख सिफारिश के रूप में प्रस्तुत करने का इरादा जताया है।
AI‑आधारित निगरानी की विस्तृत रूपरेखा
सुझाए गए सिस्टम में कैमरा फीड, ऑडियो विश्लेषण, तथा वास्तविक‑समय डेटा एनालिटिक्स को जोड़कर दान बॉक्स से निकले हर नोट की पहचान और ट्रैकिंग की जाएगी। इससे न केवल नकद गिनती की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि अनधिकृत पहुंच को भी तुरंत पता चल सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक को लागू करने से भविष्य में समान चोरी की घटनाओं की संभावना काफी घटेगी।
बैंकिंग और सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव
वर्तमान में मंदिर के दान बॉक्स से निकले नकद को एसबीआई के नई घाट शाखा में जमा किया जाता है। हाल ही में ट्रस्टी और निजी बैंक के अधिकारियों के बीच बैठक के बाद, कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, जिसमें कई बैंकों में समान रूप से जमा करना या किसी अन्य बैंक में स्थानांतरण शामिल है। साथ ही, ट्रस्ट ने सुरक्षा पासों को निष्क्रिय कर दिया है, जिससे पूर्व कर्मचारियों के पास वैध प्रवेश नहीं रहेगा।
क़ानूनी कार्रवाई और आगे की जाँच
अब तक आठ लोग, जिनमें दान गिनती में शामिल ट्रस्ट कर्मचारी शामिल हैं, को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने लगभग 80 लाख रुपये नकद और कुछ गहने बरामद किए हैं। अतिरिक्त रूप से, आयकर विभाग, स्थानीय बैंकों और रजिस्ट्री कार्यालयों से आरोपी के आय, संपत्ति और निवेश की विस्तृत जानकारी मांगी गई है। दो अभियुक्तों को सात दिन की हिरासत में रखने की याचिका दायर की गई है, जिसका सुनवाई 14 जुलाई को एंटी‑करप्शन कोर्ट में तय है।
भविष्य की दिशा
AI‑आधारित निगरानी प्रणाली की सिफारिश न केवल आयोध्या मंदिर में बल्कि देश के अन्य धार्मिक संस्थानों में भी लागू हो सकती है। यह कदम तकनीकी समाधान को सामाजिक समस्याओं के समाधान में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है, जिससे सार्वजनिक भरोसा पुनः स्थापित हो सके।