सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बावजूद बेंगलुरु में कई प्रमुख मार्गों पर फुटपाथों की अनुपस्थिति यात्रियों को जोखिम में डाल रही है। यह लेख शहर की पैदल चलने की बुनियादी सुविधाओं की खामियों, उनके कारणों और संभावित सुधारों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- बेंगलुरु में कई प्रमुख बस स्टॉप और मेट्रो स्टेशन के पास फुटपाथ नहीं हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित फुटपाथ को मौलिक अधिकार घोषित किया, लेकिन कार्यान्वयन में कमी है।
- शहरी योजना में वाहन‑केन्द्रित सोच के कारण पैदल यात्रियों की अनदेखी होती है।
बेंगलुरु में सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने वाले कई यात्रियों को अब भी सबसे बड़ी चुनौती ‘अंतिम मीटर’ की दूरी तय करना है, जहाँ फुटपाथ नहीं होने के कारण उन्हें सड़कों के किनारे 700 मीटर तक चलना पड़ता है। 32 वर्षीया कैरोलिन बी., जो एक साल से अधिक समय तक बीएमटीसी बस से हेब्बल‑माराठहली के बीच यात्रा करती थीं, अंततः निजी वाहन इस्तेमाल करने लगीं क्योंकि फुटपाथ की कमी ने उन्हें असुरक्षित बना दिया।
सुप्रीम कोर्ट का मौलिक अधिकार
जून 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित, सुलभ और बाधारहित फुटपाथ को मौलिक अधिकार घोषित किया, जिससे केंद्र एवं राज्य सरकारों को पैदल यात्रियों के लिए उचित बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करने का दायित्व मिला। लेकिन बेंगलुरु में कई प्रमुख स्थानों पर अभी भी फुटपाथ नहीं हैं, जिससे इस निर्णय का प्रभाव सीमित रह गया है।
वास्तविकता में अंतर
शहर के कई व्यस्त चौराहों—हेब्बल, सिल्क बोर्ड, गोरा गुन्टेपाल्य, जालहली और आउटर रिंग रोड—पर हजारों यात्रियों को बस या मेट्रो से उतरने के बाद असंतत फुटपाथ या पूरी तरह से फुटपाथ की अनुपस्थिति का सामना करना पड़ता है। यह समस्या केवल फुटपाथ के टूटने की नहीं, बल्कि उनकी पूरी गैर‑हाजिरी की है, जिससे यात्रियों को वाहन के बीच में चलना पड़ता है।
योजनागत सोच में बदलाव की आवश्यकता
विश्व संसाधन संस्थान (WRI) के कार्यकारी निदेशक पवन मुलुकुत्रा का मानना है कि शहरी योजना में दीर्घकालिक रूप से वाहन‑केन्द्रित दृष्टिकोण रहा है। इंजीनियरों को मुख्यतः वाहन‑मैत्री मार्ग बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है, जबकि पैदल यात्रियों को अनदेखा किया जाता है। इस मानसिकता में बदलाव लाने के लिए शहरी डिज़ाइनर, ट्रांसपोर्ट प्लानर और सार्वजनिक नीति विशेषज्ञों को योजना प्रक्रिया में शामिल करना आवश्यक है।
भविष्य की दिशा
ग्रेटर बेंगलुरु एरिया (GBA) के पाँच कॉरपोरेशन ने अपने बजट में नई फुटपाथों के निर्माण को प्राथमिकता दी है, विशेषकर मेट्रो स्टेशनों, बस स्टैंड और अंडरपास के आसपास। यदि इन पहल को सही ढंग से लागू किया गया तो बेंगलुरु का ‘पैदल‑मैत्री’ शहर बनने का लक्ष्य संभव हो सकता है।