वित्तीय प्रवर्तन एजेंसी ने दिल्ली और उत्तराखंड में कई मनी चेंजरों की तलाशी ली, जहाँ विदेशी मुद्रा के बिना KYC और दस्तावेजीकरण के लेनदेन होने का संदेह है। जांच में बड़े पैमाने पर नकद, विदेशी मुद्रा और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए।
नई दिल्ली – एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) तथा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोपों के तहत दिल्ली, ऋषिकेश और देहरादून में कई मनी चेंजरों की तलाशी ली। एजेंसी ने बताया कि कुछ लाइसेंसधारी मनी चेंजर, उनके फ्रेंचाइजी और संबंधित इकाइयाँ बिना आवश्यक Know Your Customer (KYC) प्रक्रियाओं के विदेशी मुद्रा का लेनदेन कर रही थीं, साथ ही ‘हवाला’ जैसी अवैध विधियों का उपयोग भी किया जा रहा था।
पृष्ठभूमि और नियामक ढांचा
FEMA का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा के लेनदेन को नियंत्रित करना और अवैध प्रवाह को रोकना है। RBI की मास्टर डायरेक्शन ऑन मनी चेंजिंग एक्टिविटीज में लाइसेंसधारी मनी चेंजर को केवल फ्रेंचाइज़र की ओर से ही विदेशी मुद्रा खरीदने और विस्तृत लेनदेन रिकॉर्ड रखने का निर्देश दिया गया है। इन नियमों की अनदेखी करने पर गंभीर आर्थिक और कानूनी परिणाम हो सकते हैं।
तलाशी के दौरान बरामद वस्तुएँ
ED ने गंगा फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड, JPJN फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, एल्पाइन फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य सम्बद्ध कंपनियों के कार्यालयों तथा प्रमुख व्यक्तियों के आवासीय स्थानों पर कार्रवाई की। ऑपरेशन के दौरान लगभग ₹54.58 लाख की विदेशी मुद्रा, ₹33.98 लाख की अनलेखित भारतीय नकद, दस्तावेज़ और डिजिटल डिवाइसें बरामद की गईं। कुल मिलाकर लगभग ₹27.83 करोड़ मूल्य की संपत्ति को FEMA उल्लंघन के तहत जब्त करने की संभावना है।
भ्रष्टाचार और हवाला के संकेत
जमा किए गए सबूतों से यह स्पष्ट हुआ कि कई इकाइयों ने अंतरराष्ट्रीय ‘हवाला’ नेटवर्क के माध्यम से अवैध धन प्रवाह को सुविधाजनक बनाया था। विदेशी मुद्रा के भौतिक स्टॉक में रिकॉर्डेड बैलेंस से बड़े अंतर पाए गए, जो दर्शाता है कि लेनदेन के वास्तविक आँकड़े पुस्तकों में दर्ज नहीं किए गए थे। एजेंसी ने कहा कि यह ‘प्राथमिक तथ्य’ है कि खाते और स्टॉक रजिस्टर वास्तविक लेनदेन के अनुरूप नहीं थे।
भविष्य की कार्रवाई और संभावित प्रभाव
ED ने बताया कि फ्रेंचाइजी के पास ग्राहक‑वार रिकॉर्ड, KYC दस्तावेज़, एन्कैशमेंट सर्टिफिकेट या खरीद रजिस्टर नहीं मिले। यह RBI के निर्देशों के विरुद्ध है, जहाँ फ्रेंचाइजी को केवल अपने फ्रेंचाइज़र की ओर से ही विदेशी मुद्रा खरीदने और सभी लेनदेन का विस्तृत रिकॉर्ड रखने की अनिवार्यता है। आगे की जाँच में वित्तीय प्रवाह का पूरा ट्रेस किया जाएगा, जिससे अन्य संभावित उल्लंघनकर्ता भी उजागर हो सकते हैं।
इस कदम से भारत में विदेशी मुद्रा लेनदेन के नियामक पालन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक स्पष्ट संदेश जाता है, और बाजार में पारदर्शिता व विश्वसनीयता को बढ़ावा मिलेगा।