रुपए पर दबाव बढ़ने और विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट को रोकने के लिए भारत सरकार नई रणनीति अपना रही है। वित्त मंत्री निर्मला सिथारमन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों से मिलने वाले हैं, ताकि FCNR(B), OFCB और ECB जैसे स्रोतों से विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाया जा सके।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट को रोकने के लिए नई रणनीति
  • फ़ाइनेंशियल मिनिस्टर निर्मला सिथारमन बैंकों से मुलाकात करेंगे
  • FCNR(B), OFCB और ECB जैसी तीन प्रमुख चैनल पर ध्यान

नई दिल्ली – भारत सरकार ने मौद्रिक तनाव और विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) भंडार में तेज गिरावट को देखते हुए एक व्यापक योजना की घोषणा की है। फरवरी में लगभग $728 बिलियन के शिखर स्तर से मई के अंत तक भंडार लगभग $682 बिलियन तक गिर गया, जिससे रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) को रूपी को समर्थन देने के लिए अपने आरक्षित कोष का उपयोग करना पड़ा।

पृष्ठभूमि और कारण

वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष, ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे भारत, जो विश्व का बड़ा तेल आयातकर्ता है, को डॉलर की माँग में असामान्य वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, विदेशी निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार से निकास, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफ़डीआई) की मंदी और खाड़ी देशों से प्रवाह में गिरावट ने फॉरेक्स भंडार पर अतिरिक्त दबाव डाला है। एक और बड़ी चिंता NRI (नॉन‑रेजिडेंट भारतीय) डॉलर जमा की तीव्र गिरावट है, जो पिछले वित्तीय वर्ष में $7 बिलियन से घटकर इस वर्ष लगभग $1 बिलियन तक आ गई है।

तीन प्रमुख चैनल

सरकार ने तीन प्रमुख साधनों को विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ाने के लिए प्रमुखता दी है:

  • FCNR(B) जमा – एनआरआई द्वारा भारतीय बैंकों में विदेशियों की मुद्रा (मुख्यतः USD) में खोले जाने वाले फिक्स्ड डिपॉज़िट, जिससे मुद्रा जोखिम नहीं रहता।
  • OFCB (ओवरसीज फ़ॉरेन करंसी बॉन्ड) – भारतीय बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी किए गए बॉन्ड, जो विदेशी निवेशकों से फॉर्मेटेड फंड जुटाते हैं।
  • ECB (एक्सटर्नल कमर्शियल बोरॉइंग्स) – भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशियों से ली गई ऋण, जो अक्सर व्यापार विस्तार, पूँजीगत व्यय या मौजूदा ऋण पुनर्वित्त के लिए उपयोग होते हैं।

आगे का रास्ता

वित्त मंत्री निर्मला सिथारमन के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, IDBI बैंक और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के साथ होने वाले निकट भविष्य के मुलाकातों में इन तीन चैनलों के नियमन, प्रोत्साहन और संभावित जोखिम प्रबंधन पर गहन चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो विदेशी मुद्रा भंडार में पुनः वृद्धि संभव है, जिससे रूपी पर अपार दबाव कम होगा।

यह कदम न केवल मौद्रिक स्थिरता को सुदृढ़ करेगा, बल्कि भारत की विदेशी निवेश आकर्षण को भी पुनः स्थापित करेगा, जो दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है।