पशु‑पालन को अब परिवार का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे भारत में पेट‑केयर बाजार 2024 के 30,000 करोड़ रुपये से 2032 में 2.1 लाख करोड़ रुपये तक सात गुना बढ़ेगा। प्रीमियम फ़ूड, ग्रूमिंग, हेल्थकेयर और पालतू जन्मदिन उत्सव नई ख़र्ची श्रेणियों को जन्म दे रहे हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- भारत का पेट‑केयर बाजार 2024 में 30,434 करोड़ रुपये, 2032 तक 2.1 लाख करोड़ रुपये अनुमानित
- डॉग‑केस 60%, कैट‑केस 30%, शेष 10% में छोटे पालतू जैसे खरगोश, गिनी पिग, हैमस्टर शामिल
- प्रीमियम फ़ूड, ग्रूमिंग, हेल्थकेयर, बर्थडे केक जैसे सेक्टर तेज़ी से बढ़ रहे हैं
पिछले दशक में भारत में पालतू जानवरों को केवल सुरक्षा या मनोरंजन का साधन समझा जाता था, पर अब उन्हें परिवार का अभिन्न सदस्य माना जा रहा है। इस सामाजिक बदलाव ने उपभोक्ता खर्च में गहरा असर डाला है, जिससे पेट‑केयर उद्योग ने पारम्परिक फ़ूड से आगे बढ़कर स्वास्थ्य, बीमा, तकनीक‑आधारित सेवाओं और लक्ज़री एक्सेसरीज़ तक का व्यापक इको‑सिस्टम तैयार किया है।
बाजार का आकार और भविष्यवाणी
इंडियन ब्रैंड इक्विटी फोरम (IBEF) के अनुसार, 2024 में भारतीय पेट‑केयर का मूल्य लगभग 30,434 करोड़ रुपये (US$3.6 बिलियन) था। शहरीकरण, मध्य‑वर्गीय आय में वृद्धि और कोविड‑19 के दौरान पालतू अपनाने की लहर ने इस आंकड़े को अगले आठ साल में सात गुना बढ़ाते हुए 2032 में लगभग 2.1 लाख करोड़ रुपये (US$24.8 बिलियन) तक पहुंचाने की संभावना जताई है।
पशु परिवार का विस्तार: कुत्ते‑बिल्ली से छोटे पालतू तक
परंपरागत रूप से कुत्ते और बिल्लियों ने बाजार का 90% हिस्सा संभाला था, पर अब दालिया, गिनी पिग, हैम्स्टर, बुडगी, तोता, सजावटी मछलियां और छोटे रेंगने वाले जानवर भी शहरी घरों में जगह बना रहे हैं। डीकॉर एनीमल हॉस्पिटल के आंकड़ों के अनुसार, कुत्ते 60%, बिल्लियां 30% और शेष 10% अन्य छोटे पालतू हैं। यह विविधता विशेषीकृत वैटेरिनरी क्लीनिक, प्रजाति‑विशिष्ट पोषण और ग्रूमिंग उत्पादों की मांग को तेज कर रही है।
प्रीमियम फ़ूड और ग्रूमिंग: खर्च में नई ऊँचाइयाँ
पेट‑पैरेंट अब ग्रेन‑फ़्री, ब्रीड‑स्पेसिफिक, फ्रिज‑ड्राइड और फ्रेस‑कुक्ड डाइट को प्राथमिकता दे रहे हैं। दिल्ली की एक पालतू मालिक, ज्योति जायसवाल, ने बताया कि वह पहले 800 रुपये प्रति माह सस्ते फ़ूड पर खर्च करती थीं, पर अब वैटेरिनरी सलाह के बाद 2,500‑3,000 रुपये का प्रीमियम ब्रांड ले रही हैं। ग्रूमिंग भी केवल विशेष अवसरों तक सीमित नहीं रहा; दिके‑क्लीनिंग और नाखून ट्रिमिंग जैसी बुनियादी सेवाओं की कीमतें छोटे पालतू के लिए 500 रुपये से लेकर बड़े पालतू के लिए 800 रुपये तक हैं, जबकि वार्षिक ग्रूमिंग खर्च लगभग 2,000 रुपये तक पहुँचता है।
जन्मदिन समारोह: नई निच मार्केट
पेट‑बर्थडे केक और कस्टम डेकोरेशन अब एक उभरता हुआ व्यापार क्षेत्र बन गया है। पिचमपुरा स्थित पूचीज़ पाई पेट बेकरी के अनुसार, औसत ग्राहक अपने कुत्ते या बिल्ली के जन्मदिन पर लगभग 1,000 रुपये खर्च करता है, जिसमें केक, कपकेक, डोनट और छोटे एक्सेसरीज़ शामिल होते हैं। यह ट्रेंड न केवल उपभोक्ता अनुभव को समृद्ध कर रहा है, बल्कि छोटे‑बिज़नेस को भी लाभान्वित कर रहा है।
हेल्थकेयर लागत में निरंतर बढ़ोतरी
फ़ूड और ग्रूमिंग के बाद हेल्थकेयर सबसे बड़ी पुनरावृत्त खर्च श्रेणी बन चुका है। डीकॉर एनीमल हॉस्पिटल के आंकड़े दर्शाते हैं कि एक सामान्य चेक‑अप की औसत लागत लगभग 1,200 रुपये है, जबकि वैक्सीन, डीवॉर्मिंग और विटामिन सप्लीमेंट्स के साथ कुल वार्षिक खर्च 5,000‑7,000 रुपये तक पहुँच सकता है। साथ ही, पेट‑इन्श्योरेंस और विशेष उपचारों की मांग भी बढ़ रही है, जिससे भविष्य में इस सेक्टर में प्रीमियम‑आधारित मॉडल का विकास संभावित है।
सारांश में, भारत का पेट‑केयर इको‑सिस्टम अब केवल बुनियादी पोषण से आगे बढ़ कर एक बहु‑आयामी, उच्च‑मूल्य वाला उद्योग बन चुका है। जैसे-जैसे अधिक परिवार पालतू को ‘परिवार का सदस्य’ मानेंगे, इस बाजार में निवेश, नवाचार और नियामक समर्थन की संभावनाएँ भी उतनी ही विस्तृत होंगी।