सीबीआई ने भारत के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टा जाल के खिलाफ 11 नई चार्ज शीट दायर की और प्रमुख आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत किए। चार मुख्य आरोपी पर रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर उन्हें आर्थिक भगोड़े घोषित करने की प्रक्रिया तेज़ हुई।
नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने महादेव एप सट्टा मामले में 11 नई चार्ज शीट दायर कर एक बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट को ध्वस्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। यह कदम बहुकरोड़ रुपये की धंधा चलाने वाले जाल की जाँच में नई तीव्रता को दर्शाता है, जिसका संचालन विदेश से किया जाता था।
छह प्रमुख आरोपी के खिलाफ छह चार्ज शीट
एक समूह में सीबीआई ने आशिम दास, रोहित गुलाटी, विकास छापड़िया, अनिल धामानी, विशाल अहुजा और धीरज अहुजा के खिलाफ छह चार्ज शीट दायर की। इन पर 1988 का भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम, साथ ही भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश का आरोप है। ये आरोप इस बात पर आधारित हैं कि उन्होंने सट्टा संचालन को सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर आगे बढ़ाया।
पैंसठ व्यक्तियों के खिलाफ अतिरिक्त पांच चार्ज शीट
एक समानांतर जांच में, सीबीआई ने 66 व्यक्तियों, जिनमें प्रमुख आरोपियों सौरभ चंद्रकार और रवि उप्पाल शामिल हैं, के खिलाफ पाँच और चार्ज शीट दायर की। यह समूह महादेव एप के सट्टा पैनलों का संचालन करता था, जो विभिन्न राज्यों में फैले थे और लाखों उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करते थे।
महादेव एप: भारत का सबसे बड़ा अवैध सट्टा नेटवर्क
महादेव एप को अब तक के सबसे बड़े अवैध सट्टा ऑपरेशनों में से एक माना जाता है। चंद्रकार और उप्पाल ने इस ऐप को सामाजिक मीडिया के ज़ोरदार प्रचार के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर फैलाया, जिससे उपयोगकर्ताओं को विभिन्न खेलों पर दांव लगाने के लिए आकर्षित किया गया। इस नेटवर्क ने लाखों रुपये की आय को म्यूल बैंक खातों के जटिल जाल के माध्यम से शोधन किया और अंततः विदेश भेजा। साथ ही, कुछ सार्वजनिक कर्मचारियों को "प्रोटेक्शन मनी" के रूप में भुगतान किया गया, जिससे भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें उजागर होती हैं।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जाँच
सीबीआई ने पहले ही चार मुख्य आरोपियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पकड़ने की कोशिश शुरू कर दी है। अब इनको आर्थिक भगोड़े घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। एजेंसी ने बताया कि जाँच जारी है और वह सिंडिकेट के संभावित राजनीतिक और नौकरशाही संरक्षण को भी उजागर करने पर काम कर रही है। अगले कुछ महीनों में और अधिक चार्ज शीट दाखिल होने की संभावना है, जिससे पूरी सट्टा जाल का निवारण संभव हो सकेगा।
इस विकास से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां डिजिटल अपराधों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं, और भविष्य में इसी प्रकार के बड़े पैमाने के सट्टा नेटवर्क को रोकने के लिए कड़े नियामक कदम उठाए जा सकते हैं।