पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की वार्षिक फीस वृद्धि को 5% तक सीमित करने का आदेश दिया और पिछले तीन सालों में 15% से अधिक बढ़ी फीस का धन अभिभावकों को लौटाने का निर्देश जारी किया। यह कदम शिक्षा क्षेत्र में अभिभावकों के बोझ को कम करने और शैक्षणिक शुल्क में अनावश्यक लाभ को रोकने के लिए उठाया गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- निजी स्कूलों की वार्षिक फीस वृद्धि 5% तक सीमित
- पिछले 3 साल में 15% से अधिक बढ़ी फीस का धन अभिभावकों को लौटाना अनिवार्य
- नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना व स्कूल का मान्यतापत्र रद्द
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि राज्य के निजी स्कूलों को अब केवल 5 प्रतिशत तक ही वार्षिक फीस वृद्धि की अनुमति होगी। साथ ही, पिछले तीन वर्षों में 15 प्रतिशत से अधिक शुल्क वृद्धि वाले स्कूलों को अभिभावकों को अतिरिक्त रकम वापस करनी होगी, चाहे वह ट्यूशन, ट्रांसपोर्ट या किसी भी अन्य सहायक शुल्क के रूप में क्यों न लिया गया हो।
नियमों का विस्तृत स्वरूप
यह घोषणा Punjab Regulation of Fee of Un-aided Educational Institutions (Amendment) Ordinance, 2026 के तत्काल लागू होने के साथ हुई, जिसे राज्यपाल गुलाब चंद कटरिया ने स्वीकृति दी है और पिछले महीने कैबिनेट ने मंजूरी दी थी। इस अध्यादेश में चार प्रमुख प्रावधान शामिल हैं: (i) वार्षिक फीस वृद्धि 5% तक सीमित, (ii) 15% से अधिक वृद्धि पर अतिरिक्त राशि का पूर्ण वापसी, (iii) सभी अतिरिक्त चार्ज—जैसे कि बिल्डिंग फंड, ट्रांसपोर्ट, कंप्यूटर या खेल शुल्क—को ट्यूशन शुल्क का हिस्सा माना जाएगा, और (iv) उल्लंघन पर 50,000 से 1,00,000 रुपये के जुर्माने तथा मान्यतापत्र रद्द करने की सजा।
निगरानी और प्रवर्तन तंत्र
मुख्यमंत्री ने बताया कि डिप्टी कमिश्नरों के नेतृत्व में एक नियामक समिति स्कूलों की फीस संरचना की जांच करेगी। सभी निजी स्कूलों को पिछले चार वर्षों की फीस विवरण 10 दिनों के भीतर शिक्षा विभाग के पोर्टल पर अपलोड करनी होगी, जहाँ सरकार इसे विस्तृत ऑडिट के साथ समीक्षा करेगी। यदि कोई स्कूल विभिन्न हेड्स के तहत शुल्क लेता है, तो उसे ‘विद्या माफिया’ माना जाएगा और सख़्त कार्रवाई की जाएगी।
विशेष परिस्थितियों में लचीलापन
नियमों में कुछ अपवाद भी शामिल हैं। यदि कोई स्कूल नई इमारत, लाइब्रेरी या स्मार्ट क्लासरूम जैसी बुनियादी ढाँचा सुधार में निवेश करता है, तो वह जिला‑स्तरीय शुल्क नियामक समिति से 8% तक की वृद्धि का अनुरोध कर सकता है। एक बार निवेश वसूली हो जाने पर फिर से 5% की सीमा लागू होगी। साथ ही, स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों की प्रवेश प्रक्रिया में भी पारदर्शिता बरतनी होगी।
समाज पर संभावित प्रभाव
यह निर्णय 32 लाख छात्रों और 7,800 निजी स्कूलों को सीधे प्रभावित करेगा। अभिभावकों के लिए यह राहत के स्वरूप में देखा जा रहा है, विशेषकर उन परिवारों के लिए जो मौजूदा आर्थिक दबावों से जूझ रहे हैं। शिक्षा के बाजार में ‘लाभ‑केन्द्रित’ मॉडल को नियंत्रित करने के इस कदम को कई विशेषज्ञ ‘ऐतिहासिक’ और ‘प्रगतिशील’ मानते हैं, क्योंकि पंजाब इस दिशा में भारत का पहला राज्य बन रहा है।