विजे के आखिरी तमिल फिल्म 'जाना नायगन' को ए प्रमाणपत्र मिलने से पहले कई दृश्य, संवाद और राजनीतिक संकेत हटाए गए। सीबीएफसी ने TVK का उल्लेख हटाने, ध्वनि को मौन करने और राष्ट्रीय प्रतीकों को हटाने का आदेश दिया। इस लेख में उन सभी बदलावों का विस्तृत विवरण दिया गया है।
भारत के सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन (CBFC) ने तमिल सुपरस्टार थलापती विजय की फिल्म जाना नायगन को ए सर्टिफ़िकेट जारी करने से पहले कई संवेदनशील सामग्री को हटाया या बदल दिया। यह कदम लगभग सात माह के विलंब के बाद आया, जब फिल्म को अंततः मंज़ूरी मिली।
मुख्य बदलाव: TVK का हटाना
विजे के किरदार का नाम थलापती वेत्री कोंडन (TVK) था, जो बाहर की दुनिया में विजय की राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेत्री कज़हागम (TVK) का संक्षिप्त रूप है। प्रमाणन नोट में टाइम‑कोड 110:23 पर यह बताया गया कि "अंबेडकर सताम… टू… TVK सताम" वाले संवाद को पूरी तरह बदल दिया गया, और TVK का उल्लेख ऑडियो‑विज़ुअल दोनों से हटाया गया। बदलाव को मौन करके लागू किया गया, जिससे फ़िल्म की अवधि में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
अन्य ऑडियो‑विज़ुअल कट्स
सम्पूर्ण सूची में कई और परिवर्तन शामिल हैं:
- "अंबेडकर बुक के कवर पर दिखाया गया" वाला संवाद संशोधित किया गया।
- भारतीय ध्वज को जमीन पर गिरते हुए दिखाने वाला दृश्य हटाया गया।
- "भगवतम" और "रंगनाथर" जैसे शब्दों को मौन किया गया।
- "ओम" तथा "न्यू इंडिया" जैसे शब्दों को हटाया गया।
- सद्दाम हत्याकांड से जुड़ी दृश्य सामग्री को या तो मौन किया गया या बदल दिया गया।
- डिसी के बैज या गिग को अनादरपूर्ण ढंग से गिराते हुए दिखाने वाला दृश्य हटाया गया।
संवेदनशील संवादों का मौन
फ़िल्म में कुछ संवादों को पूरी तरह से मौन किया गया, जैसे "पोनोदा… कुद्थु वाचिरु्क्कुम, उडंबु एरुकीरुन्नु" और "इंडिया न क़ल्ला विराला वैकरने"। बाल-जलाने वाले दृश्य को भी हटाकर बदल दिया गया। "सिलुवाइला" शब्द को मौन किया गया, जबकि "शीला रानी" नाम को पूरी तरह से बदल दिया गया।
फ़िल्म की वर्तमान स्थिति
इन सभी कट्स के बाद फ़िल्म की कुल लंबाई 3 घंटे 3 मिनट रह गई है। अभी तक आधिकारिक रिलीज़ तिथि घोषित नहीं हुई है, लेकिन कई स्रोतों का अनुमान है कि यह 23 या 24 जुलाई को सिनेमाघरों में दिखाई जाएगी।
पिछला इतिहास और विवाद
जाना नायगन मूलतः 9 जनवरी को पोंगल के अवसर पर रिलीज़ होने वाली थी, परन्तु दिसंबर 2025 में CBFC को सबमिट करने के बाद कई संशोधनों की मांग की गई। पुनः सबमिट करने के बाद प्रारम्भिक रूप से यू/ए सर्टिफ़िकेट का प्रस्ताव आया, लेकिन एक समिति सदस्य की आंतरिक शिकायत के कारण फ़िल्म को पुनः समीक्षा के लिए भेजा गया। फिल्म के हाई‑डिफिनिशन कॉपी के लीक होने से तमिलनाडु पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें एक फ्रीलांस फ़िल्म एडिटर भी शामिल था। लीक की वजह से लगभग 1.2 करोड़ लोग अनधिकृत रूप से फ़िल्म देख चुके थे, जिससे फ़िल्म की रिलीज़ में और देरी हुई।
इन सब घटनाओं के बीच, ऑनलाइन एक नकली CBFC सर्टिफ़िकेट भी फ़ेल हुआ, जिसने दर्शकों में भ्रम और उत्सुकता दोनों पैदा की।