दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग की सबसे प्रिय गायिका S Janaki का 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनकी आवाज़ ने छह दशकों तक तमिल सिनेमा के भावनात्मक परिदृश्य को आकार दिया और कई पीढ़ियों को प्रभावित किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • S Janaki का निधन 88 वर्ष की आयु में
  • छह दशकों से तमिल सिनेमा की प्रमुख ध्वनि
  • इलाईरायाजा और एम एस विस्वनाथन के साथ उनका सहयोग

S Janaki, जिन्हें कई पीढ़ियों की नाइटिंगेल कहा जाता है, 12 जुलाई 2026 को मैसूर के एक निजी अस्पताल में उम्र‑संबंधी जटिलताओं के कारण निधन हो गया। उनका निधन भारतीय फिल्म इतिहास में एक बड़े क्षति के रूप में दर्ज किया गया है।

प्रारंभिक जीवन और करियर की शुरुआत

अंध्र प्रदेश में जन्मी Janaki ने 1950 के मध्य में अपने चाचा की सलाह पर चेन्नई आकर AVM स्टूडियो में प्रवेश किया। उनका प्लेबैक करियर 1957 में तमिल फिल्म “विद्यीण विलायत्तु” से शुरू हुआ, हालांकि यह पहला गीत व्यावसायिक रूप से उल्लेखनीय नहीं था, लेकिन इसने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े संगीत सफर की नींव रखी।

संगीत में परिवर्तनकारी क्षण

1962 में “कोन्जुम सालंगई” के “सिंगारा वेलाने देव” गीत ने Janaki को एक प्रमुख गायक के रूप में स्थापित किया। नाडस्वरम् वाद्य यंत्र के साथ उनका तालमेल और शास्त्रीय संगीत की नाजुकता ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बाद में एम एस विस्वनाथन ने उनके बहुमुखी प्रतिभा को पहचाना और 1960‑70 के दशक में कई हिट गीतों में उनका सहयोग किया, जैसे “अवलुकेन्द्रु ओर मनम्” का “उन्निदथिल एन्नै कोडुथेन”。

इलाईरायाजा के साथ साझेदारी

इलाईरायाजा के साथ उनका सहयोग Janaki को दंतकथा में बदल दिया। 1970 के दशक के अंत से 1990 तक, इलाईरायाजा ने Janaki को अपने सबसे जटिल रचनाओं में से कई सौंपे—वेस्टर्न मेलोडी, कर्नाटिक राग, ग्रामीण लोक संगीत और गहरी भावनात्मक बॉलडों के बीच सहज परिवर्तन करने की उनकी क्षमता ने उन्हें अनन्य बना दिया। “सेंथूरा पूवे” (16 वयथिनिले), “इंजि इडुपाज़गी” (थेवर माँगन), “पोनमेनी उरुगुथे” (मूंद्राम पिरई) जैसे गीतों ने उनकी गायन की बहु‑आयामी क्षमताओं को प्रदर्शित किया।

विरासत और प्रभाव

Janaki की सबसे बड़ी ताकत यह थी कि वह केवल “गाता” नहीं, बल्कि “प्रदर्शन” करती थीं। वह गीत के भाव को समझकर उसमें हँसी, आँसू, फुसफुसाहट और कभी‑कभी किरदार की आवाज़ की नकल भी करती थीं। इस कारण से कई निर्देशक उनका पात्र की भावनात्मक ग्राफ़ केवल एक बार सुनकर ही पढ़ सकते थे। आज भी उनके गीतों को सुनते हुए दर्शक यह महसूस करते हैं कि आवाज़ में किसी अभिनेता की पहचान नहीं, बल्कि उसकी आत्मा बसती है।

सिनेमा जगत ने Janaki को एक नायिका के रूप में याद किया है, और उनका संगीत भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर रहेगा।