मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश के 26 जिलों में 94,200 लोग बाढ़‑भू‑स्खलन से प्रभावित हुए। अपर सियांग सबसे गंभीर, जहाँ 16 स्थल पर लैंडस्लाइड दर्ज की गई। राहत कार्यों में भारतीय सेना, वायुसेना और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल शामिल हैं।

गुहावाटी (रिपोर्ट) – उत्तर‑पूर्वी भारत के अरुणाचल प्रदेश में लगातार तेज़ बारिश ने 26 जिलों में व्यापक बाढ़ और भू‑स्खलन उत्पन्न किए हैं। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 94,200 लोग, 333 गांवों में रहने वाले, इस आपदा से सीधे प्रभावित हुए हैं।

सबसे प्रभावित जिले

अपर सियांग को सबसे अधिक नुकसान हुआ, जहाँ 16 अलग‑अलग स्थानों पर लैंडस्लाइड दर्ज की गई। इसके बाद सियांग और क्रा‑डादी के आंकड़े आते हैं। पिछले 24 घंटे में चांगलांग, अपर सुबंसिरी और ईस्ट कमेंग जिलों में भी जल‑संकट और चट्टान गिरने की घटनाएँ रिपोर्ट की गईँ।

मानव जीवन और संपत्ति पर असर

अब तक चार लोगों की जान जा चुकी है। 24 जून को की‑पानीओर में एक जलविद्युत परियोजना के कॉलोनी में अचानक बाढ़ ने तीन लोगों की मौत कर दी, जबकि चार दिन बाद अंजाव जिले के सरती गांव में लैंडस्लाइड ने एक और मौत का कारण बना। दो महिलाएँ अभी भी लापता हैं।

कृषि क्षेत्र में 334.2 हेक्टेयर फसलें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुईं, जिनमें 185.5 हेक्टेयर बागवानी और 148.7 हेक्टेयर सामान्य खेती शामिल है। लगभग 1,010 हेक्टेयर वन क्षेत्र भी प्रभावित हुआ। इन्फ्रास्ट्रक्चर के नुकसान में 131 सड़कों, 19 पुलों, 21 जल निकासी नालों, 191 जल आपूर्ति प्रणाली और कई सरकारी भवन, विद्युत लाइनों और स्कूलों की क्षति शामिल है।

राहत एवं बचाव प्रयास

भारतीय सेना और वायुसेना ने हेलीकॉप्टरों से बाढ़‑ग्रस्त इलाकों में लोगों को बचाया और राहत सामग्री पहुँचाई। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) के साथ मिलकर सशस्त्र बलों ने निरंतर बचाव कार्य जारी रखा है।

हाइड्रोप्रोजेक्ट विवाद

असम के एक विधायक ने अरुणाचल में चल रही बड़े पैमाने की जलविद्युत परियोजनाओं को बाढ़ के प्रमुख कारण के रूप में उजागर किया। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में बाँधों से अचानक पानी निकालना नीचे के क्षेत्रों में जल‑संकट को बढ़ा रहा है। यह मुद्दा पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन के अभाव में तेज़ी से अनुमोदित परियोजनाओं के प्रति सार्वजनिक असंतोष को दर्शाता है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने अगले दो दिनों में लोहित, चांगलांग और तिराप जिलों में तेज़ बारिश, गरज‑बिजली की चेतावनी जारी की है, जिससे स्थिति और बिगड़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसमी पैटर्न में असामान्य बदलाव, बाढ़‑भू‑स्खलन जैसी आपदाओं की आवृत्ति बढ़ा रहा है, और भविष्य में ऐसी घटनाओं के लिए बेहतर पूर्व चेतावनी एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर सुदृढ़ीकरण आवश्यक होगा।