दिल्ली सरकार रिज क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने के लिए आठ महत्वपूर्ण जल निकायों को पुनर्जीवित करेगी, जिससे भूजल पुनर्भरण और वन्यजीव संरक्षण में मदद मिलेगी।

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के पारिस्थितिक स्वास्थ्य को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, प्रशासन ने दिल्ली के मध्य और दक्षिणी रिज क्षेत्र में स्थित आठ जल निकायों के पुनरुद्धार की घोषणा की है। 'दिल्ली रिज इको-रेस्टोरेशन प्रोग्राम' के तहत इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य न केवल भूजल स्तर (groundwater recharge) को बढ़ाना है, बल्कि मिट्टी की नमी को बनाए रखना और शहरी जलभराव की समस्या से भी निजात पाना है।

पारिस्थितिक संतुलन और रणनीतिक योजना

यह पहल केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन के साझा प्रयासों का हिस्सा है, जिसे हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिल्ली के मेगा वृक्षारोपण अभियान के दौरान शुरू किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, रिज क्षेत्र दिल्ली के लिए एक 'ग्रीन बफर' के रूप में कार्य करता है, जो धूल भरी आंधियों को रोकने और शहर के सूक्ष्म जलवायु (microclimate) को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

चिह्नित क्षेत्र और कार्यप्रणाली

परियोजना के लिए आठ विशिष्ट स्थानों की पहचान की गई है। दक्षिणी रिज में देवली, छतरपुर, भट्टी और अयानगर गांवों के आसपास के जल निकायों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। वहीं, मध्य रिज में शंकर रोड (पॉकेट बी), वंदे मातरम रोड (पॉकेट बी और एफ) और रामनाथ विज मार्ग (पॉकेट ई) के क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ये स्थल प्राकृतिक रूप से गड्ढों या निचले इलाकों के रूप में हैं, जो मानसून के दौरान पानी जमा करते हैं। हालांकि, गाद (siltation) जमा होने और रखरखाव के अभाव के कारण इनकी क्षमता कम हो गई है। परियोजना के तहत इन गड्ढों की सफाई की जाएगी, उनकी गहराई बढ़ाई जाएगी और पत्थर की पिचिंग (stone pitching) की जाएगी ताकि वे अधिक से अधिक वर्षा जल संचय कर सकें।

वन्यजीव और जलवायु परिवर्तन पर प्रभाव

इस पुनरुद्धार का एक प्रमुख लाभ स्थानीय जैव विविधता को मिलेगा। जल निकायों के पुनर्जीवित होने से पक्षियों और अन्य वन्यजीवों को पानी का एक विश्वसनीय स्रोत मिलेगा। साथ ही, प्राकृतिक जल निकासी चैनलों का निर्माण करके अत्यधिक वर्षा के पानी को इन निकायों की ओर मोड़ा जाएगा, जिससे आसपास के इलाकों में होने वाले जलभराव में कमी आएगी। यह कदम जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों के खिलाफ दिल्ली की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करेगा।