राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) को निर्देश दिया है कि वह बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से 33 पेड़ों के अवैध कटने के कारण 2.65 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना वसूल करे। यह आदेश पिछले साल के अगस्त में दिये गये निर्देशों की अनुपालन न होने के बाद आया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • NGT ने BHU पर 2.65 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया
  • 33 पेड़, जिनमें 7 चंदन के पेड़ शामिल हैं, अवैध रूप से काटे गए
  • UPPCB को तीन महीने में जुर्माना वसूली की अंतिम समय सीमा दी गई

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) को एक स्पष्ट आदेश जारी किया है, जिससे बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) को 2.65 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना (EC) भरना पड़ेगा। यह जुर्माना 33 पेड़ों के अवैध कटने के कारण लगाया गया है, जिनमें सात मूल्यवान चंदन के पेड़ भी शामिल थे।

पिछले आदेश की अनदेखी

गत वर्ष 11 अगस्त को NGT ने UPPCB को तीन महीने के भीतर पर्यावरणीय प्रतिपूर्ति की गणना और वसूली करने का निर्देश दिया था। हालांकि, बोर्ड ने उस समय सीमा का पालन नहीं किया, जिससे न्यायाधिकरण ने आज के आदेश के साथ प्रक्रिया को तेज करने का निर्णय लिया।

न्यायाधिकरण की वर्तमान सुनवाई

मुख्य बेंच, जिसमें चेयरपर्सन प्रकाश शृवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद शामिल हैं, ने अधिवक्ता सौरभ तिवारी द्वारा दायर कार्यान्वयन आवेदन को सुनते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने UPPCB से कहा कि वह अपनी गणना को अंतिम रूप दे और तीन महीने के भीतर जुर्माने की वसूली पूरी करे। समय सीमा न पूरी होने पर आगे की सज़ा भी संभव है।

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया और पुनर्स्थापनात्मक उपाय

यूनिवर्सिटी ने 2025 में 978 विभिन्न प्रजातियों के पेड़ लगाए और 859 पौधों को सुरक्षित स्थिति में रहने की रिपोर्ट प्रस्तुत की। यह संख्या न्यायाधिकरण के आदेश में निर्धारित पुनर्स्थापनात्मक वृक्षारोपण की संख्या से अधिक है, जिससे यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय ने नुकसान की भरपाई के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं।

भविष्य में संभावित प्रभाव

यह निर्णय न केवल BHU के लिए बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक चेतावनी स्वरूप है। यदि पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो भारी आर्थिक दंड और सार्वजनिक निगरानी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, यह केस पर्यावरणीय अनुपालन की निगरानी को मजबूत करने और नीतियों को सख्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।