भारी वर्षा के कारण उत्तराखंड में लैंडस्लाइड ने 120 सड़कों को बंद कर दिया, जिनमें तीन राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल हैं। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो दिन तक फंसे 100 तीर्थयात्रियों को रस्सी और वैकल्पिक मार्ग से सुरक्षित निकाला गया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- उत्ताखंड में 120 सड़कें भारी बारिश के कारण बंद
- यमुनोत्री राष्ट्रीय हाईवे पर 100 तीर्थयात्रियों का सफल बचाव
- सरकार ने वैकल्पिक मार्ग और सुरक्षा उपायों को तेज़ किया
जुलाई 2026 की शुरुआती दो दिनों में उत्तराखंड को असामान्य मात्रा में वर्षा का सामना करना पड़ा, जिससे कई पहाड़ी क्षेत्रों में लैंडस्लाइड हुए। राज्य भर में 120 सड़कों को बाधित कर दिया गया, जिनमें तीन राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) भी शामिल हैं, जिससे यात्रा और आपूर्ति मार्ग गंभीर रूप से प्रभावित हुए।
लैंडस्लाइड और सड़कों का बंद होना
उत्तर्काशी जिले के स्यनाचत्ती में भारी बारिश के बाद एक विशाल लैंडस्लाइड ने लगभग 100 मीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग ध्वस्त कर दिया। इस घटना ने न केवल स्थानीय ट्रैफ़िक को रोक दिया, बल्कि यमुनोत्री तीर्थयात्रा मार्ग को भी दो दिन तक पूरी तरह से बंद कर दिया। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) ने तुरंत कार्यवाही की, लेकिन निरंतर बारिश और नई गिरती हुई मलबा ने मरम्मत कार्य को धीमा कर दिया।
तुरंत बचाव कार्य
रक्षा कर्मियों ने वैकल्पिक पथ पर एक मजबूत रस्सी बिछा कर, एक-एक करके फंसे यात्रियों को सुरक्षित किया। इस प्रक्रिया में विशेष रूप से वृद्ध और बच्चों की सुरक्षा पर ध्यान दिया गया। कुल मिलाकर लगभग 100 तीर्थयात्रियों को सफलतापूर्वक बचाया गया, जबकि कुछ यात्रियों को अस्थायी शरणस्थलों में ठहराया गया।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
उत्तर्काशी जिला मजिस्ट्रेट प्रशांत आर्य ने घटना स्थल का निरीक्षण कर, वैकल्पिक मार्ग के शीघ्र पूर्णता और यमना नदी पर पुल के निर्माण को एक सप्ताह के भीतर पूरा करने का आदेश दिया। उन्होंने सुरक्षा उपायों में अतिरिक्त रस्सियों, सोलर लाइट्स और संकेतकों की व्यवस्था को भी अनिवार्य किया।
अन्य प्रभावित राजमार्ग
रिषिकेश-केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग रुद्रप्रयाग में सिरेओबागर के पास मलबे के कारण बाधित हुआ, जबकि कोटद्वार-सत्पुली राजमार्ग पौरी जिले में भी रोक दिया गया। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) ने इन मार्गों की सफाई के लिए निरंतर प्रयास जारी रखने की सूचना दी।
मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि पिछले 24 घंटों में कई जगहों पर 135 mm तक की बारिश दर्ज हुई, जिससे जलस्तर में तेज़ वृद्धि और अतिरिक्त लैंडस्लाइड की संभावना बनी रही। इन घटनाओं ने उत्तराखंड के पहाड़ी बुनियादी ढांचे की संवेदनशीलता को फिर से उजागर किया है।