थूटुकुड़ी शहर में बढ़ते आवारा कुत्ते और गायों की समस्या ने स्थानीय प्रशासन को कड़ी कार्रवाई के लिए मजबूर किया है। नई नीतियों, दंड और शरणस्थल निर्माण से इस संकट को कम करने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- आवारा पशु समस्या पर कड़ा ₹5,000 का जुर्माना लागू
- डम्पिंग यार्ड में शरणस्थल और एबीसी केंद्र स्थापित
- स्वच्छ सड़क नीति के साथ पार्कों में सुरक्षा उपाय बढ़ाए जाएंगे
थूटुकुड़ी शहर में आवारा पशुओं की समस्या पिछले कई वर्षों से नागरिकों की चिंता का प्रमुख कारण रही है। कुत्तों और गायों की अनियंत्रित आवागमन न केवल सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालता है, बल्कि सड़कों की स्वच्छता और ट्रैफ़िक प्रवाह को भी बाधित करता है। नगर निगम ने इस मुद्दे को हल करने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं, परंतु समस्या अभी भी जड़ पकड़ चुकी है।
मूल कारण और मौजूदा उपाय
शहर के अधिकांश गायें वास्तव में पालतू पशु हैं, जिन्हें मालिकों द्वारा जानबूझकर मुक्त किया जाता है। इस कारण से नगर निगम ने 2025 में गायी मालिकों पर ₹5,000 का जुर्माना लगाया, जिससे अनियंत्रित पशु मुक्त करने की प्रवृत्ति घटे। कुत्तों के लिए, थारुवैकुलम डम्पिंग यार्ड में स्थित एबीसी (Animal Birth Control) केंद्र में निरोधक उपाय चलाए जा रहे हैं, जिससे जनसंख्या नियंत्रण संभव हो रहा है।
निवासियों की आवाज़ और चुनौतियाँ
मुनीयास्मयपुरम के निवासी राजा ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में कुत्तों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे स्थानीय समुदाय में भय का माहौल बना है। राजीव नगर के सीपीआई(एम) सचिव एम.एस. मूथु ने बताया कि स्कूलों के पास कुत्तों की मौजूदगी छात्रों की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है। साथ ही, पक्कल नहर के पास मांस के अपशिष्ट को निपटाने वाले कसाईयों की अनियमित फेंकाव से कुत्तों की आकर्षण बढ़ी है।
नए नगर नीति और भविष्य की दिशा
हाल ही में थूटुकुड़ी निगम ने थूटुकुड़ी हेल्दी स्ट्रीट्स पॉलिसी और व्यापक सड़क डिजाइन दिशानिर्देश अपनाए हैं। इन नीतियों का मुख्य उद्देश्य पैदल यात्रियों के लिए निरंतर फुटपाथ बनाना और सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाना है। हालांकि, कुत्तों की उपस्थिति को देखते हुए, इन योजनाओं की कार्यान्वयन में अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
शहर की कार्रवाई का विस्तृत विवरण
मेयर जैगन पेरियासामी ने बताया कि थारुवैकुलम डम्पिंग यार्ड और मुथैहपुरम में आवारा कुत्तों के लिए शरणस्थल तैयार किए जा रहे हैं, जबकि गैर-सरकारी संगठनों को इन शरणस्थलों की देखभाल के लिए आमंत्रित किया गया है। पार्कों जैसे रॉचे, राजाजी और एमजीआर को परीक्षणात्मक रूप से निजीकरण किया गया है, जिससे शरणस्थल की निगरानी आसान हो सके। साथ ही, कसाईयों से उत्पन्न मांस के अपशिष्ट को एकत्र करने के लिए विशेष वाहन तैनात किए जाएंगे, जिससे कुत्तों की आकर्षण घटेगी।
इन सभी कदमों के बावजूद, स्थानीय नागरिकों का मानना है कि जागरूकता, जिम्मेदार पालतू पालन और निरंतर निगरानी ही दीर्घकालिक समाधान हो सकते हैं।