राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (SC-NBWL) ने दुनिया के सबसे छोटे और दुर्लभ जंगली सूअर, पिग्मी हॉग को 'गंभीर रूप से लुप्तप्राय' प्रजातियों की सूची में शामिल करने का सुझाव दिया है। इस कदम का उद्देश्य केंद्र प्रायोजित योजना के माध्यम से इनके संरक्षण को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु
- पिग्मी हॉग को 'गंभीर रूप से लुप्तप्राय' श्रेणी में शामिल करने की सिफारिश की गई है।
- IDWH योजना के तहत राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
- असम में सफल संरक्षण के बाद अब अन्य घास के मैदानों पर ध्यान दिया जाएगा।
- पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में इनके पुनरुद्धार की संभावना तलाशी जाएगी।
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (SC-NBWL) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पिग्मी हॉग (Sus Saalvanius) को 'गंभीर रूप से लुप्तप्राय' प्रजातियों की सूची में शामिल करने की सिफारिश की है। यह प्रजाति दुनिया के सबसे छोटे और दुर्लभ जंगली सूअरों में से एक मानी जाती है।
यह सिफारिश केंद्र प्रायोजित योजना, एकीकृत वन्यजीव आवास विकास (IDWH) के तहत की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य लुप्तप्राय प्रजातियों और उनके आवासों के संरक्षण के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। 9 जुलाई को हुई बैठक में, भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने देश में पिग्मी हॉग की वर्तमान स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
महत्वपूर्ण क्यों है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पिग्मी हॉग का संरक्षण केवल एक प्रजाति को बचाना नहीं है, बल्कि घास के मैदानों (grassland ecosystems) की पारिस्थितिक स्थिरता बनाए रखना भी है। चूँकि यह एक 'आइकॉनिक ग्रासलैंड प्रजाति' है, इसलिए इसकी उपस्थिति स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत देती है।
पिग्मी हॉग का संरक्षण घास के मैदानों के पारिस्थितिक तंत्र को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
WII ने असम में चलाए गए सफल संरक्षण प्रयासों का उल्लेख किया और सुझाव दिया कि इस कार्यक्रम को प्रजाति के ऐतिहासिक निवास क्षेत्रों के अन्य उपयुक्त घास के मैदानों तक विस्तारित किया जाना चाहिए। बैठक के दौरान जलदपाड़ा (पश्चिम बंगाल) और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों को भविष्य में इनके पुनरुद्धार (reintroduction) के लिए उपयुक्त माना गया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिग्मी हॉग कभी भारतीय घास के मैदानों का एक प्रमुख हिस्सा हुआ करते थे, लेकिन आवासों के विनाश और शिकार के कारण इनकी संख्या में भारी गिरावट आई। वर्तमान में, इनके अस्तित्व को बचाने के लिए केवल कुछ ही संरक्षित क्षेत्रों में इनका अस्तित्व बचा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: IDWH योजना क्या है?
उत्तर: यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है जो लुप्तप्राय वन्यजीव प्रजातियों और उनके आवासों के संरक्षण के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
प्रश्न 2: पिग्मी हॉग कहाँ पाए जाते हैं?
उत्तर: वर्तमान में ये मुख्य रूप से असम के कुछ हिस्सों में पाए जाते हैं, लेकिन इन्हें अन्य घास के मैदानों में वापस लाने की योजना है।