अधिकारियों ने बताया कि राज्य के 17 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 800 प्रोफ़ेसर पदों में से 200 खाली हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री सत्य कुमार यादव ने सेवानिवृत्ति आयु 63 से बढ़ाकर निजी संस्थानों के बराबर 70 करने की संभावना जताई।
विजयवाड़ा, 9 जुलाई 2026 – राज्य के स्वास्थ्य, मेडिकल और परिवार कल्याण मंत्री सत्य कुमार यादव ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रोफ़ेसरों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। वर्तमान में प्रोफ़ेसरों की सेवानिवृत्ति आयु 63 वर्ष है, जबकि निजी कॉलेजों में यह 70 वर्ष है।
वर्तमान स्थिति
राज्य के 17 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कुल 800 प्रोफ़ेसर पद अनुमोदित हैं, लेकिन लगभग 200 पद अभी भी रिक्त हैं। विशेष रूप से 16 सुपर‑स्पेशलिटी विभागों में 159 में से 106 प्रोफ़ेसर पद खाली हैं, जिससे पोस्ट‑ग्रेजुएट प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। राष्ट्रीय मेडिकल कमिशन (NMC) के अनुसार प्रत्येक तीन पोस्ट‑ग्रेजुएट सीटों के लिए एक प्रोफ़ेसर अनिवार्य है, परन्तु इस मानक को पूरा करना अब चुनौती बन गया है।
प्रस्तावित नीति बदलाव
मंत्री ने कहा कि प्रोफ़ेसरों के पदों को केवल प्रोमोशन के माध्यम से नहीं, बल्कि योग्य उम्मीदवारों को सीधे नियुक्त करके भी भरा जा सकता है। सेवानिवृत्ति आयु को 70 वर्ष तक बढ़ाने से अनुभवी शिक्षकों को लंबा समय सेवा करने का अवसर मिलेगा, जिससे शैक्षणिक निरंतरता और शोध‑उत्पादन दोनों में सुधार की उम्मीद है। इस दिशा में मेडिकल शिक्षा निदेशक ए. विष्णु वार्धन को एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
निजी व सरकारी संस्थानों के बीच अंतर
निजी मेडिकल कॉलेजों में 70 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु लागू है, जिससे वे प्रोफ़ेसर रिक्तियों से comparatively मुक्त हैं। सरकारी कॉलेजों में 63 वर्ष की सीमा के कारण कई अनुभवी शिक्षकों को जल्दी रिटायर होना पड़ता है, जबकि उनके स्थान पर योग्य उम्मीदवार नहीं मिल पाते। इस असंतुलन को दूर करने के लिए आयु वृद्धि एक संभावित समाधान माना गया है।
वित्तीय पहलू
बजट 2026‑27 के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र को आवंटित कुल ₹18,216 करोड़ में से पहले तिमाही में केवल ₹4,130 करोड़ (लगभग 22.72%) खर्च हुए हैं। मंत्री ने केंद्रीय सहायता के बेहतर उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया और भविष्य में अधिक फंड्स को शिक्षा‑संबंधी बुनियादी ढाँचे में लगाने की अपील की।
नियमों की निगरानी
बैठक में निजी कॉलेजों में पाई गई कुछ उल्लंघनात्मक प्रथाओं पर भी चर्चा हुई। NMC के मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए डॉ. एन.टी.आर. यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंसेज़ को सरप्राइज़ इंस्पेक्शन करने और सुधारात्मक कदम उठाने का आदेश दिया गया।
इन सभी कदमों का उद्देश्य सरकारी मेडिकल शिक्षा को सुदृढ़ बनाना, प्रोफ़ेसर रिक्तियों को कम करना और भविष्य के डॉक्टरों को उच्चतम स्तर की प्रशिक्षण सुविधा प्रदान करना है।