कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने टेलीऑपरेटेड मानवाकृति रोबोट को जीवित जानवरों पर गैल्ब्लैडर हटाने की सर्जरी सफलतापूर्वक कराते हुए इतिहास रचा। यह प्रयोग भविष्य के ऑपरेटिंग रूम को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रोबोटिक सर्जरी ने पिछले दो दशकों में स्वास्थ्य‑सेवा का परिदृश्य बदल दिया है, लेकिन अधिकांश सिस्टम विशेष रूप से एक‑एक कार्य के लिए निर्मित बड़े‑मशीन होते हैं। इन उपकरणों की लागत, स्थान‑घेराव और विशेष बुनियादी ढाँचा इन्हें केवल बड़े शहरी अस्पतालों तक सीमित रखता आया है। अब कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, सैन डिएगो (UCSD) के इंजीनियर‑सर्जन टीम ने इस मानदंड को तोड़ते हुए, सामान्य प्रयोजन वाले मानवाकृति रोबोट को टेलीऑपरेशन के माध्यम से लाइव न्यूनतम-आक्रमण सर्जरी में प्रयोग किया।
सर्जी के लिए विकसित किया गया ‘सर्जी’ (Surgie)
परियोजना ने पाँच फीट ऊँचाई और लगभग 60 पाउंड वजन वाले मानवाकृति रोबोट को पारंपरिक लैप्रोस्कोपिक उपकरणों के साथ कार्य करने के लिये अनुकूलित किया। शोधकर्ताओं ने इसे "Surgie" नाम दिया और टेलीऑपरेशन इंटरफ़ेस के ज़रिए सर्जनों को दूरस्थ रूप से नियंत्रित करने की सुविधा प्रदान की। इस ढाँचे में रोबोट मानव हाथ की गति को सटीक रूप से दोहराता है, जिससे जटिल टिश्यू डिसेक्शन और बायोप्सी जैसे कार्य संभव होते हैं।
प्रीक्लिनिकल परीक्षण और परिणाम
दो बड़े गैर‑प्राइमेट प्राणियों पर गैल्ब्लैडर हटाने की सर्जरी की गई। पहली बार रोबोट ने एक मानव सर्जन के साथ टीम बनाकर कार्य किया, जबकि दूसरी बार दो टेलीऑपरेटेड रोबोट ने स्वतंत्र रूप से सभी लैप्रोस्कोपिक उपकरण संभालें। दोनों प्रक्रियाएँ बिना किसी प्रमुख जटिलता के पूरी हुईं, जिससे यह सिद्ध हुआ कि वर्तमान मानवाकृति तकनीक न्यूनतम‑आक्रमण सर्जरी की सटीकता, नियंत्रण और सुरक्षा मानकों को पूरा कर सकती है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
सर्जिकल देखभाल में मानव संसाधन की कमी और ग्रामीण‑शहरी असमानता को देखते हुए, टेलीऑपरेटेड मानवाकृति रोबोट सस्ते, पोर्टेबल और मौजूदा ऑपरेटिंग‑रूम में बिना बड़े बदलाव के समाहित हो सकते हैं। यह तकनीक भविष्य में दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ सर्जरी की पहुँच को लोकतांत्रिक बना सकती है।
भविष्य की संभावनाएँ
UCSD के प्रोफेसर माइकल यिप ने बताया कि स्वायत्त या टेलीऑपरेटेड रोबोट न केवल शल्यचिकित्सा की पहुंच बढ़ाएंगे, बल्कि आपातकालीन स्थितियों, अस्थायी अस्पतालों और मानवीय राहत मिशनों में भी त्वरित परिनियोजन संभव होगा। रोबोट की मानवीय आकार‑रूप और चलन‑सुविधा उन्हें पारंपरिक रोबोटिक प्लेटफ़ॉर्म से अलग करती है, जिससे छोटे क्लिनिक और मोबाइल इकाइयों में भी उनका उपयोग संभव है।
सुरक्षा और नियामक चुनौतियाँ
भले ही प्रयोग सफल रहा हो, मानवाकृति रोबोट को व्यापक क्लिनिकल उपयोग के लिये नियामक अनुमोदन, दीर्घकालिक सुरक्षा डेटा और एथिकल गाइडलाइन की आवश्यकता होगी। विशेषकर डेटा सुरक्षा, हाइब्रिड मानव‑रोबोट इंटरफ़ेस और आपातकालीन फेल‑सेफ मैकेनिज़्म पर विस्तृत अध्ययन अनिवार्य है।
अंततः, यह उपलब्धि न केवल रोबोटिक सर्जरी के विकास को गति देती है, बल्कि स्वास्थ्य‑सेवा में तकनीकी समानता के नए युग की ओर एक स्पष्ट संकेत देती है।