केरल सोशल सेक्योरिटी मिशन (KSSM) द्वारा चलाए गए ‘ब्रेक द चैन’ अभियान में वित्तीय अनियमितताओं की रिपोर्ट सामने आई है। जांच टीम ने सम्पूर्ण ऑडिट की सिफ़ारिश की और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मोहम्मद आशील के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव रखा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- केंद्रीय वित्तीय निरीक्षण ने KSSM में 4.88 करोड़ रुपये खर्च की गई ‘ब्रेक द चैन’ योजना में अनियमितताएँ उजागर कीं।
- रिपोर्ट में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मोहम्मद आशील के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफ़ारिश की गई।
- आशील ने रिपोर्ट को षड्यंत्र बताया और 69 पृष्ठों का विस्तृत जवाब दिया, जिसे ‘असंतोषजनक’ करार दिया गया।
केरल सरकार ने COVID‑19 के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से ‘ब्रेक द चैन’ अभियान शुरू किया, जिसे राज्य के केरल सोशल सेक्योरिटी मिशन (KSSM) ने लागू किया। हाल ही में वित्तीय निरीक्षण विंग (NT‑D) की एक रिपोर्ट ने इस अभियान में कई वित्तीय और प्रशासनिक irregularities की ओर इशारा किया है, जिससे सार्वजनिक भरोसे को हिला देने की संभावनाएँ बन रही हैं।
जांच की मुख्य खोजें
रिपोर्ट के अनुसार, 4.88 करोड़ रुपये खर्च किए गए इस अभियान के लिए सरकार ने KSSM को स्पष्ट रूप से जिम्मेदारी नहीं सौंपी थी, न ही किसी आधिकारिक आदेश या मंजूरी की प्रक्रिया पूरी हुई। KSSM के मुख्यालय में किए गए कार्यों के लिए न तो अनुमान तैयार किए गये, न ही टेंडर प्रक्रिया का पालन किया गया, और स्टॉक रजिस्टर में उचित प्रविष्टियाँ नहीं की गईं।
ऑडिट और सामाजिक जांच की कमी
आंतरिक ऑडिट केवल KSSM द्वारा चुनी गई चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्म द्वारा किया गया, जबकि प्रदर्शन या सामाजिक ऑडिट का कोई प्रमाण नहीं मिला। कई IEC (इन्फ़ॉर्मेशन, एजुकेशन, कम्युनिकेशन) कार्य निजी एजेंसियों को बिना पूर्व सरकारी अनुमति या पोस्ट‑कम्प्लीशन रैटिफिकेशन के सौंपे गए। यह सभी बिंदु वित्तीय निरीक्षण टीम ने ‘अनुपालन नहीं’ के रूप में वर्गीकृत किए।
आशील की प्रतिक्रिया
मोहम्मद आशील, जो तब के KSSM के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर थे, ने इस रिपोर्ट को ‘असमान्य’ और ‘षड्यंत्र’ बतलाते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) को लिखित में रिपोर्ट को निरस्त करने की मांग की। उन्होंने 69 पृष्ठों का विस्तृत उत्तर दिया, जिसमें कानूनी, तकनीकी और तथ्यात्मक प्रमाणों के साथ सभी आरोपों का खंडन किया गया, परन्तु इसे ‘असंतोषजनक’ करार दिया गया। आशील का दावा है कि उन्हें निरीक्षण टीम द्वारा सात बार भी व्यक्तिगत रूप से संपर्क नहीं किया गया।
‘ब्रेक द चैन’ की सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्वता
‘ब्रेक द चैन’ को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ माना गया था। The Lancet ने इसके व्यवहारिक नजों (behavioral nudges) की सराहना की, जबकि MIT ने इसे कम लागत, उच्च प्रभाव वाली महामारी प्रतिक्रिया हेतु एक प्रतिलिप्य योग्य मॉडल कहा। आशील का कहना है कि इस अभियान ने 2020 में लगभग 15,000 जीवन बचाए और 5 लाख से अधिक संक्रमणों को रोका, जिससे केरल की स्वास्थ्य प्रणाली को महत्वपूर्ण समय मिला।
रिपोर्ट के अनुसार, अब एक व्यापक ऑडिट को लागू करने और आशील के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की सिफ़ारिश की गई है, ताकि भविष्य में ऐसी सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।