भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन बिल को अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने 'ईसाई समुदाय पर हमला' करार दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इससे भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में तनाव आ सकता है।
मुख्य बातें
- अमेरिकी सांसद राइली मूर ने FCRA संशोधन को ईसाई समुदाय पर हमला बताया।
- मूर ने चेतावनी दी कि इससे भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ सकता है।
- केंद्र सरकार का तर्क है कि संशोधनों का उद्देश्य विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता लाना है।
- बिल के तहत सरकार को धार्मिक संस्थाओं के फंड पर नियंत्रण की शक्ति मिल सकती है।
भारत के फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के अमेरिकी सांसद राइली मूर ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है। मूर ने इसे भारतीय ईसाई समुदाय पर एक 'सीधा हमला' बताते हुए कहा कि यह भारत और अमेरिका के बीच राजनयिक संबंधों के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है।
धार्मिक स्वतंत्रता और राजनीतिक विवाद
सांसद राइली मूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने भारत में ईसाई धर्म के प्राचीन इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि सेंट थॉमस के आगमन के बाद से यह समुदाय यहां मौजूद है। मूर का आरोप है कि प्रस्तावित संशोधन सरकार को चर्चों और धार्मिक चैरिटी संस्थाओं के कामकाज और उनके विदेशी फंड पर अत्यधिक नियंत्रण प्रदान करेंगे।
"यह ईसाई समुदाय पर सीधा हमला है। अगर यह बिल इसी तरह आगे बढ़ता है, तो यह भारत के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों में बड़ी चिंता का विषय होगा।" - राइली मूर
क्यों महत्वपूर्ण है यह बिल?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद केवल धार्मिक नहीं बल्कि वित्तीय पारदर्शिता और संप्रभुता से भी जुड़ा है। प्रस्तावित FCRA संशोधन बिल, 2026 के तहत सरकार एक 'नामित प्राधिकरण' (Designated Authority) का गठन करना चाहती है। इस प्राधिकरण के पास विदेशी चंदे से खरीदी गई संपत्तियों और फंड के प्रबंधन का पूर्ण अधिकार होगा।
FCRA संशोधनों का एक नजर में विवरण
| विशेषता | मौजूदा नियम | प्रस्तावित संशोधन (2026) |
|---|---|---|
| नियंत्रण | गृह मंत्रालय पंजीकरण | नया 'नामित प्राधिकरण' नियुक्त होगा |
| फंड ट्रांसफर | सीमित प्रतिबंध | दूसरे संगठनों को फंड ट्रांसफर पर सख्त पाबंदी |
| न्यूनतम सीमा | कोई सख्त सीमा नहीं | 10 लाख रुपये से कम उपयोग पर रिन्यूअल पर संकट |
विपक्ष और नागरिक समाज का तर्क है कि इससे केरल और मिजोरम जैसे राज्यों में सक्रिय शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थानों को भारी नुकसान हो सकता है। वहीं, केंद्र सरकार का रुख स्पष्ट है कि यह कदम 'विषैले' NGOs पर लगाम लगाने और विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. FCRA क्या है?
यह कानून तय करता है कि भारत में गैर-सरकारी संगठन (NGO) और धार्मिक संस्थाएं विदेशी चंदा कैसे प्राप्त और उपयोग कर सकती हैं।
2. विवाद का मुख्य कारण क्या है?
विवाद का मुख्य कारण सरकार द्वारा धार्मिक संस्थाओं के फंड और संपत्तियों पर मिलने वाला प्रस्तावित अत्यधिक नियंत्रण है।