निज्जर, खालिस्तान समर्थक आतंकवादी, ने अर्ज़ दल्ला को भारत से भागकर कनाडा शरण लेने के लिए प्रेरित किया, यह बात नई चार्जशीट में सामने आई है। दल्ला को बाद में भारत द्वारा आतंकवादी घोषित किया गया, जिससे भारत‑कनाडा संबंधों में तनाव बढ़ गया।
जुलाई 2024 में पेश किए गए एक विस्तृत चार्जशीट ने यह उजागर किया है कि निज्जर, जो 2023 में सरी, ब्रिटिश कोलंबिया में एक गुरुद्वारे के बाहर मारा गया, ने अपने सहयोगी अर्ज़ दल्ला को भारत से भागकर कनाडा में शरण लेने के लिए मनाया था। इस खुलासे ने खालिस्तान आंदोलन की अंतरराष्ट्रीय जड़ें और भारत‑कनाडा कूटनीतिक टकराव को एक नई परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया है।
पृष्ठभूमि: खालिस्तान आंदोलन और निज्जर की भूमिका
खालिस्तान आंदोलन 1980 के दशक में पंजाब में उत्पन्न हुआ, जिसका उद्देश्य पंजाब को भारत से अलग करके एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाना था। निज्जर इस आंदोलन के उग्र कट्टरपंथियों में से एक माना जाता था, और वह कई बार भारत की सुरक्षा एजेंसियों की नजर में रहा। 2023 में सरी में उसकी हत्या ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को फिर से उजागर किया, क्योंकि हत्या के पीछे भारत के खुफिया एजेंटों का हाथ माना गया।
अर्ज़ दल्ला का प्रोफ़ाइल और कनाडा में भागना
अर्ज़ दल्ला, जिसे पहले एक स्थानीय गैंगस्टर के रूप में जाना जाता था, खालिस्तान समर्थकों के साथ मिलकर कई आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा। चार्जशीट के अनुसार, निज्जर ने दल्ला को भारत की सुरक्षा एजेंसियों के दबाव से बचने के लिए कनाडा में शरण लेने का सुझाव दिया। दल्ला ने इस सलाह को मानते हुए 2022 में अपने परिवार के साथ कनाडा के सरी शहर में प्रवास किया, जहाँ वह कई भारतीय प्रवासी संगठनों के साथ जुड़ गया।
भारत द्वारा आतंकवादी सूची में दल्ला का नाम
दल्ला की कनाडा में रहने के दौरान भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने उसके खिलाफ गहन जाँच शुरू की। 2024 के मध्य में, दल्ला को आधिकारिक तौर पर भारत की आतंकवादी सूची में शामिल किया गया, जिससे उसे वित्तीय लेन‑देनों और अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इस कदम को भारत‑कनाडा कूटनीतिक तनाव के बढ़ते चरण के रूप में देखा गया, क्योंकि कनाडा ने अभी तक दल्ला को आतंकवादी मान्यता नहीं दी थी।
कनाडा‑भारत संबंधों पर संभावित प्रभाव
यह खुलासा दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और जटिल बना सकता है। भारत ने पहले भी कनाडा पर खालिस्तान समर्थकों को शरण देने का आरोप लगाया था, जबकि कनाडा ने भारत की संप्रभुता का सम्मान करने का आश्वासन दिया है। दल्ला को आतंकवादी घोषित करने के बाद, दोनों देशों के बीच सूचना‑साझाकरण, आपराधिक न्याय सहयोग और राजनयिक संवाद में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
भविष्य की दिशा और निष्कर्ष
निज्जर‑दल्ला मामले की जांच से यह स्पष्ट होता है कि खालिस्तान आंदोलन अब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जड़ें जमा रहा है, और इसके प्रमुख व्यक्तियों के बीच पारस्परिक सहयोग जारी है। यदि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता सफल नहीं हुई, तो यह मामला अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद की रोकथाम में एक नया परीक्षण बन सकता है।