प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एन्थनी अल्बानेज़े ने 18 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर करके द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ किया। ऊर्जा, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और साइबर सहयोग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार क्षेत्रीय स्थिरता को पुनः परिभाषित करेगा।

जुलाई 10, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एन्थनी अल्बानेज़े ने 18 व्यापक समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जो भारत‑ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक भागीदारी को नई ऊँचाई पर ले जाने का लक्ष्य रखते हैं। यह समझौते सिविल न्यूक्लियर ऊर्जा, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, साइबर सहयोग और व्यापार सहित कई प्रमुख क्षेत्रों को कवर करते हैं।

पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विपक्षीय संबंध 1990 के दशक में औपचारिक रूप से स्थापित हुए, परंतु 2014 के बाद दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को तेज़ी से आगे बढ़ाया। 2020 में प्रथम बार दो-स्तरीय रक्षा संवाद और 2022 में प्रमुख आर्थिक सहयोग समझौते ने इस सहयोग की नींव रखी। इस शिखर सम्मेलन में किए गए 18 समझौते इन पूर्ववर्तियों का विस्तार हैं, जिससे दोनों देशों के बीच भरोसे का एक नया स्तर स्थापित हो रहा है।

मुख्य क्षेत्रों में समझौते

सिविल न्यूक्लियर ऊर्जा: भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया के समृद्ध यूरेनियम संसाधन और उन्नत परमाणु तकनीक तक पहुंच सुनिश्चित की गई, जिससे भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य में तेजी आएगी।
रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा: दोनों देशों ने संयुक्त अभ्यास, रक्षा उपकरणों के बुनियादी सहयोग और हिंदु-महाद्वीपीय जल में सुरक्षा संचालन में सहयोग को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
महत्वपूर्ण खनिज: ऑस्ट्रेलिया के लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ पृथ्वी धातुओं की आपूर्ति भारत की इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए स्थिर होगी।
साइबर सहयोग: एक समर्पित साइबर सेंटर की स्थापना, सूचना साझेदारी, और डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए संयुक्त कार्य योजना तैयार की गई।
व्यापार एवं निवेश: द्विपक्षीय व्यापार को 2025 तक $30 बिलियन तक बढ़ाने के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया, साथ ही छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए विशेष वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगे।

क्षेत्रीय एवं वैश्विक प्रभाव

इन समझौतों का महत्व केवल दो देशों तक सीमित नहीं है; यह व्यापक Indo‑Pacific क्षेत्र में शक्ति संतुलन को पुनः आकार देता है। चीन के बढ़ते सैन्य और आर्थिक प्रभाव को देखते हुए, भारत‑ऑस्ट्रेलिया का यह सहयोग एक मुक्त, शांतिपूर्ण और नियम‑आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गठबंधन ASEAN, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ रणनीतिक तालमेल को भी मजबूती प्रदान करेगा।

भविष्य की राह

समझौतों के कार्यान्वयन के लिए विशेष समिति का गठन किया गया है, जो अगले दो वर्षों में प्रगति की निगरानी करेगी। दोनों देशों ने नियमित द्विवार्षिक शिखर सम्मेलन के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी है, जिससे निरंतर संवाद और सहयोग सुनिश्चित होगा। इस पहल के साथ, भारत‑ऑस्ट्रेलिया साझेदारी को एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो विकास, सुरक्षा और तकनीकी नवाचार के क्षेत्रों में अन्य देशों के लिए प्रेरणा बन सकता है।