प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के शुरुआती घंटों में एक दायाँ‑पंथी विरोधी ने उनके मेलबोर्न होटल में घुसकर नारे लगाए। अगले दिन वही प्रदर्शनकर्ता मॉरवेल स्टेडियम में आयोजित भारतीय प्रवासी सभा को बाधित करने की कोशिश में फिर सामने आया, लेकिन संगीत और भीड़ ने उनका संदेश दबा दिया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • फासीवादी विरोधी ने मोदी के होटल में प्रवेश कर नारे लगाए
  • प्रदर्शनकर्ता ने अगले दिन स्टेडियम में भी प्रदर्शन किया
  • संगीत और भीड़ ने विरोध को प्रभावी रूप से दबा दिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया के दो‑दिन के आधिकारिक दौरे के पहले दिन, एक दायाँ‑पंथी anti‑immigrant कार्यकर्ता ने मेलबोर्न स्थित उनके होटल में सुरक्षा को तोड़ते हुए प्रवेश किया और “F*** Modi!” तथा “यह ऑस्ट्रेलिया है, और कोई भारतीय नहीं चाहिए” जैसे नारे चिल्लाए। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जहाँ वीडियो में 22‑वर्षीय ह्यूगो लेनन (ऑनलाइन नाम “Auspill”) को होटल के लॉबी में लाल कार्पेट पर उतरते मोदी को चिल्लाते दिखाया गया।

पृष्ठभूमि और सुरक्षा लापरवाही

होटल में मौजूद सुरक्षा गार्डों ने तुरंत लेनन को रोकने की कोशिश की, लेकिन वह पहले‑मंज़िल के बालकनी से भीड़ को चिल्लाते रहे। अंततः विक्टोरिया पुलिस ने उसे बलपूर्वक हटाया। पुलिस ने इस बात पर टिप्पणी नहीं की कि विरोधी को मोदी की यात्रा की जानकारी कैसे मिली, पर सिडनी मॉर्निंग हरबर्ट ने बताया कि कुछ फासीवादी प्रभावशाली व्यक्तियों ने ऑनलाइन मोदी की यात्रा के मार्ग को साझा किया था।

विरोधी का प्रोफ़ाइल और पिछले कार्य

लेनन को “नियो‑नाज़ी सहयोगी” और संपत्ति विकास के धनी वारिस के रूप में पहचान मिली है। यूके के The Daily Mail के अनुसार, वह पिछले वर्ष के “मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया” आंदोलन के प्रमुख संगठकों में से एक था, जिसमें कई नियो‑नाज़ी और श्वेत राष्ट्रवादी समूहों का समर्थन था। इस आंदोलन ने ऑस्ट्रेलिया में आप्रवास विरोधी विचारधारा को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया।

दूसरे दिन का प्रदर्शन और उसका विफल होना

गुरुवार को, लेनन ने एक पूर्व‑निर्धारित योजना के तहत मेलबोर्न के मार्वल स्टेडियम के बाहर भीड़ को इकट्ठा किया, जहाँ मोदी भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करने और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानिज़े के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने वाले थे। प्रदर्शनकारियों ने “Stop Indian Invasion” और “Modi Go Home” जैसे संकेत लेकर दो घंटे तक विरोध किया, पर स्टेडियम में संगीत बजाने वाले भारतीय‑मूल के समूह और उत्सव‑भरी भीड़ ने उनके नारे दबा दिए। अंततः, एक ड्रमिंग समूह ने सीधे उनके सामने प्रदर्शन किया, जिससे लेनन को मंच छोड़ना पड़ा।

परिणाम और आगे की संभावनाएँ

मोदी का दो‑दिन का दौरा बिना किसी बड़े व्यवधान के समाप्त हुआ, जबकि छोटे‑छोटे विरोधों ने विदेश नीति या भारतीय‑ऑस्ट्रेलियाई संबंधों पर कोई प्रभाव नहीं डाला। हालांकि, इस प्रकार के दायाँ‑पंथी विरोधों की बढ़ती दृश्यता सुरक्षा एजेंसियों को भविष्य में अधिक सतर्क रहने की चेतावनी देती है।