पाकिस्तान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों ने पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है। दोनों देशों ने चेतावनी दी है कि हालिया संघर्षों से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सऊदी अरब और पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया में बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर गहरी चिंता व्यक्त की।
- यह तनाव 18 जून 2026 को हस्ताक्षरित ऐतिहासिक 'इस्लामाबाद समझौते' (Islamabad MoU) के बावजूद बढ़ा है।
- पाकिस्तान और कतर इस संकट में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं, और पीएम शहबाज शरीफ ने वार्ता को पुनर्जीवित करने के लिए ईरान और कतर के नेताओं से बात की है।
एक महत्वपूर्ण राजनयिक घटनाक्रम में, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने पश्चिम एशिया में तेजी से बढ़ते संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री सीनेटर मोहम्मद इसहाक डार और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के बीच हुई टेलीफोनिक बातचीत में दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य टकराव क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।
यह राजनयिक चिंता ऐसे समय में सामने आई है जब हाल ही में 18 जून 2026 को दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक इस्लामाबाद समझौता (Islamabad MoU) हुआ था, जिसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में शांति बहाल करना था। इसके बाद स्विट्जरलैंड में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में तकनीकी स्तर की वार्ता भी आयोजित की गई थी। हालांकि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में एक नागरिक जहाज पर हमले के बाद अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी ठिकानों पर की गई जवाबी कार्रवाई ने इस नाजुक शांति प्रक्रिया को खतरे में डाल दिया है।
पाकिस्तान इस संकट में खुद को एक सक्रिय मध्यस्थ के रूप में स्थापित कर रहा है। विदेश मंत्रियों की इस बातचीत से ठीक एक दिन पहले, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान और कतर के शीर्ष नेतृत्व के साथ अलग-अलग बातचीत की थी। इस कूटनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करना है। बातचीत के दौरान, इसहाक डार ने पाकिस्तान के रुख को दोहराते हुए सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और मध्यस्थता के प्रयासों को पर्याप्त समय देने की अपील की।
सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल ने इस बात पर जोर दिया कि नया संघर्ष किसी के हित में नहीं है और यह क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करता है। उन्होंने तनाव कम करने और निरंतर बातचीत की आवश्यकता पर बल दिया। इस बीच, पाकिस्तान ने अन्य देशों से भी संपर्क साधा है। विदेश मंत्री डार ने मालदीव की विदेश मंत्री इरुथिशम एडम से भी बात की, जिन्होंने अमेरिका-ईरान संघर्ष में पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका की सराहना की, जो इस क्षेत्र में इस्लामाबाद के बढ़ते राजनयिक प्रभाव को दर्शाता है।
भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस्लामाबाद समझौते की कमजोरी वाशिंगटन और तेहरान के बीच गहरे अविश्वास को दर्शाती है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बेहद संवेदनशील मार्ग है, और यहां किसी भी प्रकार का सैन्य गतिरोध वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला सकता है। सऊदी अरब, पाकिस्तान और कतर की संयुक्त कूटनीतिक कोशिशें इस संकट को एक बड़े वैश्विक आर्थिक संकट में बदलने से रोकने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण हैं।