शिपिंग मंत्री सरबनंदा सोनवाल ने भारतीय क्रू वाले जहाज़ों की स्थिति, कल्याण और खतरे का实时 ट्रैक रखने के लिए एक विस्तृत डैशबोर्ड बनाने का निर्देश दिया। इस पहल में परिवारों के लिए लायज़न अधिकारी और विदेशियों के साथ समन्वय का नया तंत्र भी शामिल है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भारतीय समुद्री कर्मियों की सुरक्षा के लिए रीयल‑टाइम डैशबोर्ड बनाया जाएगा
  • प्रत्येक जहाज़ के लिए लायज़न अधिकारी नियुक्त किया जाएगा
  • भारतीय दूतावासों और समुद्री प्राधिकरणों के साथ निकट समन्वय अनिवार्य किया गया

न्यू दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी तनाव के मद्देनज़र, भारतीय शिपिंग मंत्री सरबनंदा सोनवाल ने DG Shipping को निर्देश दिया है कि वह भारतीय समुद्री कर्मियों वाले सभी जहाज़ों के लिये एक व्यापक एवं रीयल‑टाइम ऑपरेशनल डैशबोर्ड तैयार करे। यह डैशबोर्ड फारसी खाड़ी, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में जहाज़ों की स्थिति, माल, क्रू की संख्या, कल्याण और संभावित खतरे की जानकारी एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर प्रदर्शित करेगा।

पृष्ठभूमि और तत्काल प्रेक्षण

पिछले हफ़्ते दो विदेशी ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज़ों पर हुए हमले, जिनमें कुल 30 भारतीय क्रू सदस्य थे, ने सरकार को तेज़ कार्रवाई करने पर मजबूर किया। इन घटनाओं ने संकेत दिया कि भारतीय समुद्री कर्मी अब भी इस क्षेत्र में जोखिम में हैं, इसलिए प्रत्येक जहाज़ की निरंतर निगरानी आवश्यक हो गई।

डैशबोर्ड की कार्यक्षमता

डैशबोर्ड में जहाज़ की वास्तविक स्थिति, स्वामित्व, माल, क्रू की संख्या, भोजन‑इंधन‑दवाइयों की उपलब्धता, संचार सुविधाएँ और अगले बंदरगाह की जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा, खतरे का पुनर्मूल्यांकन, जहाज़ के कप्तान की पेशेवर राय और अंतरराष्ट्रीय समुद्री प्राधिकरणों के साथ समन्वय को भी रीयल‑टाइम में परिलक्षित किया जाएगा।

लायज़न अधिकारी और परिवार समर्थन

हर जहाज़ के लिये एक लायज़न अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो प्रभावित समुद्री कर्मियों और उनके परिवारों का एकमात्र संपर्क बिंदु रहेगा। यह अधिकारी चिकित्सा अपडेट, यात्रा दस्तावेज़, पुनर्वास, वेतन, अनुबंधिक अधिकार और समुद्री कर्मियों कल्याण निधि (Seafarers Welfare Fund) से सहायता प्रदान करने में मुख्य भूमिका निभाएगा।

विदेशी मिशनों के साथ समन्वय

सरकार ने भारतीय दूतावासों को ईरान, ओमान और यूएई सहित प्रभावित देशों में त्वरित और सत्यापित जानकारी प्रदान करने का निर्देश दिया है। इसमें नेविगेशन सुरक्षा, तट‑राज्य सलाह, पोर्ट‑ऑफ़‑रिफ्यूज, अस्पताल सुविधाएँ, मेडिकल एवेकेशन, मृत्युपर्यंत प्रबंधन एवं चल रहे जांचों की स्थिति शामिल है।

इस व्यापक योजना के माध्यम से भारत ने अपने समुद्री कर्मियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में जोखिम‑प्रबंधन की नई मानक स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।