ब्रिटिश सरकार ने विदेशी राज्य प्रॉक्सी को राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे मानते हुए प्रतिबंधित करने की नई शक्ति प्राप्त की। इरान ने इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के रूप में निंदा की।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ब्रिटेन ने इराकी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) और रुस के GRU के सहयोगियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव रखा।
- इरान ने इस योजना को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ कहा और ब्रिटिश दूतावास को बुलाकर विरोध किया।
- नए कानून से 14 साल तक की जेल की सजा के साथ विदेशी एजेंटों के समर्थन को कड़ी सजा मिलेगी।
ब्रिटेन की संसद में इस हफ़्ते पेश किए जा रहे एक नई विधायिका में सरकार को "प्रोस्क्रिप्शन जैसी" शक्ति दी गई है, जिससे वह विदेशी राज्य के प्रॉक्सी समूहों को राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे के रूप में नामित कर सके। इस कदम का प्रमुख लक्ष्य इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉरप्स (IRGC) और रूस के ग्रू (GRU) के सहयोगियों को प्रतिबंधित करना है, साथ ही एक इरान-सम्बंधित समूह इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ कंपैनियंस ऑफ़ द राइट को भी शामिल किया गया है।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
IRGC को 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से इरान की सुरक्षा और विदेश नीति में प्रमुख भूमिका निभाते हुए देखा गया है। पिछले दो दशकों में, कई पश्चिमी देशों ने IRGC को आतंकवादी समूह घोषित किया है, जबकि इरान इसे राष्ट्रीय रक्षा की संस्थान मानता है। इस बार का प्रस्ताव इस तथ्य पर आधारित है कि लंदन में हाल ही में यहूदी समुदाय के विरुद्ध कई घातक हमले हुए, जिनमें सीनागॉगों पर आगजनी और एक समाचार प्रसारक पर हमला शामिल हैं।
ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री केयर स्टारमर ने 13 जुलाई को कहा कि "जो भी इन समूहों को समर्थन या सहायता देगा, उसे अब 14 साल तक की जेल की सजा का सामना करना पड़ेगा"। गृह मंत्रालय ने बताया कि यह कदम विदेशी जासूसी, लोकतंत्र में हस्तक्षेप, ध्वंस और शारीरिक हमलों जैसी खतरों को रोकने के लिए आवश्यक है। प्रस्तावित विधायिका इस सप्ताह संसद में बहस के लिए प्रस्तुत की जाएगी।
इरान का कड़ा विरोध
इरान के विदेश मंत्रालय ने इस कदम को "अवैध, जिम्मेदारी से बाहर और अंतरराष्ट्रीय कानून के मूलभूत सिद्धांतों के विपरीत" कहा। इरान ने ब्रिटिश दूतावास को बुलाकर इस योजना को "आधारहीन आरोप" के रूप में खारिज किया। इस विवाद ने दो देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण रिश्ते को और बढ़ा दिया है, जहाँ यूके ने पहले भी इरान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि यह कानून पारित हो जाता है, तो यह न केवल IRGC के वित्तीय समर्थन को रोक सकता है, बल्कि यूके में इरान-आधारित संस्थाओं के संचालन को भी कठिन बना देगा। साथ ही, यह कदम यूरोपीय संघ और अन्य मित्र देशों को समान कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकता है। दूसरी ओर, इरान के साथ द्विपक्षीय संवाद और कूटनीतिक प्रयासों पर संभावित असर पड़ सकता है, जिससे मध्य पूर्व में स्थिरता के मुद्दे और जटिल हो सकते हैं।