ब्रिटेन में टर्मिनल रोगियों को अंत जीवन की सहायता देने वाला बिल 330-275 के मत से पहली बार पारित हुआ। समर्थक इसे गरिमा का अधिकार मानते हैं, जबकि विरोधी इसे कमजोर वर्गों के लिए दबाव का साधन कह रहे हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ब्रिटिश संसद ने टर्मिनल रोगियों के लिए सहायक आत्महत्या बिल को प्रारम्भिक मंजूरी दी।
  • बिल में कड़े सुरक्षा उपाय, दो स्वतंत्र डॉक्टर और हाई कोर्ट जज की मंजूरी अनिवार्य है।
  • विरोधी बौद्धिक और नैतिक चिंताओं के साथ, वृद्ध एवं दिव्यांग लोगों को संभावित दबाव का जोखिम बताया गया।

लंदन—ब्रिटिश संसद ने 29 नवंबर, 2024 को एक ऐतिहासिक मतदान के बाद, टर्मिनल रोगियों को जीवन समाप्त करने की अनुमति देने वाले सहायक आत्महत्या बिल को पहली बार मंजूरी दी। 330-275 के मत से पारित यह विधेयक अभी भी कई चरणों की जांच के बाद अंतिम मतदान का इंतजार कर रहा है।

पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ

संयुक्त राज्य अमेरिका, नीदरलैंड्स और बेल्जियम जैसे देशों में सहायक आत्महत्या को कानूनी मान्यता मिलने के बाद, यूके में भी कई दशकों से इस मुद्दे पर बहस चल रही थी। 2015 में ब्रिटिश हाई कोर्ट ने टर्मिनल रोगियों को डॉक्टर की मदद से मृत्यु की अनुमति देने का वैधता पर विचार किया था, लेकिन तब तक कोई स्पष्ट विधायी ढांचा नहीं बना था। इस बिल को लाने का श्रेय लेबर पार्टी की सांसद किम लीडबीटर को जाता है, जिन्होंने निजी सदस्य बिल के रूप में इसे पेश किया।

विधानसभा में बहस के मुख्य बिंदु

विचार-विमर्श के दौरान कई व्यक्तिगत कहानियों ने संसद के सदस्यों को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया। समर्थकों ने बताया कि कई रोगी और उनके परिवार मौजूदा पलीएटिव देखभाल की कमी के कारण गुप्त रूप से आत्महत्या की योजना बनाते हैं, जो अब एक कानूनी प्रक्रिया बन जाएगी। वहीं, विपक्षी सांसद डैनी क्रुगर ने “राज्य आत्महत्या सेवा” के खतरों को उजागर किया, यह तर्क देते हुए कि सुरक्षा उपायों के बावजूद कमजोर वर्ग पर आर्थिक और सामाजिक दबाव बन सकता है।

सुरक्षा उपाय और विधायी ढांचा

बिल में कई कठोर शर्तें निर्धारित की गई हैं: केवल 18 वर्ष से अधिक आयु वाले वयस्क, जिनकी आयु अनुमानित रूप से छह महीने से कम है, ही आवेदन कर सकते हैं। रोगी को स्वयं ही घातक दवा लेनी होगी, दो स्वतंत्र चिकित्सकों की लिखित सहमति और हाई कोर्ट जज की मंजूरी अनिवार्य है। स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड में यह बिल लागू नहीं होगा, जिससे यूके के भीतर विधायी असमानता के सवाल उठते हैं।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

यह बिल लेबर पार्टी के भीतर भी विभाजन दर्शाता है; प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने सार्वजनिक रूप से समर्थन जताया, जबकि उनके स्वास्थ्य सचिव और न्याय मंत्री ने विरोध किया। यह विभाजन इंगित करता है कि भविष्य में स्वास्थ्य बजट, राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) और पलीएटिव देखभाल पर बड़े आर्थिक व नैतिक प्रभाव पड़ सकते हैं। यदि अंतिम रूप से पारित हुआ, तो यह यूके को सहायक आत्महत्या के क्षेत्र में पहला यूरोपीय देश बना देगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी और नैतिक मानदंडों में पुनः मूल्यांकन की संभावना बढ़ेगी।

भविष्य की दिशा

बिल के आगे के चरण में संसद के दोराहे कमेटी द्वारा विस्तृत जांच और संभावित संशोधन की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि पलीएटिव देखभाल में सुधार, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और सामाजिक जागरूकता को समानांतर रूप से बढ़ावा देना आवश्यक होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निर्णय रोगी की इच्छाशक्ति से ही आए, न कि बाहरी दबाव से।