केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने हालिया वायनाड भू‑स्लाइड के पीड़ितों के साथ संवाद करने के लिए आपातकालीन स्थल का दौरा किया। उन्होंने मृतकों के परिवारों को पाँच लाख रुपये की एक्स‑ग्रैटिया की घोषणा की और लापता लोगों की खोज को प्राथमिकता दी।

केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने पिछले मंगलवार को वायनाड जिले के बड़ाई पहाड़ी पर हुई भू‑स्लाइड के प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस आपदा में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई, कई अन्य घायल हुए और कई परिवार अपने प्रियजनों को खोने के शोक में डूब चुके हैं। मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन, बचाव दल और पीड़ित परिवारों के प्रतिनिधियों से मिलकर स्थिति की गंभीरता को समझा और तत्काल राहत कार्यों की दिशा-निर्देशित की।

एक्स‑ग्रैटिया घोषणा और वित्तीय सहायता

स्थल पर पहुंचते ही सतीशन ने मृतकों के परिजनों को पाँच लाख रुपये की एक्स‑ग्रैटिया राशि प्रदान करने का ऐलान किया। यह रकम तत्काल आर्थिक राहत के रूप में दी जाएगी, ताकि पीड़ित परिवारों को बुनियादी आवश्यकताओं, जैसे कि चिकित्सा खर्च और गृह पुनर्निर्माण में मदद मिल सके। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस तरह की आपदाओं में सरकार की पहली प्राथमिकता पीड़ितों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की पूर्ति है।

लापता व्यक्तियों की खोज में तेज़ी

वायनाड में भू‑स्लाइड ने कई परिवारों को अपने प्रियजनों से अलग कर दिया है। सतीशन ने कहा कि लापता लोगों की खोज को "अभी सबसे बड़ी प्राथमिकता" माना गया है। उन्होंने स्थानीय पुलिस, ड्रमेटरी फोर्स और राष्ट्रीय बचाव दल को समन्वयित करने का आदेश दिया, साथ ही डrones और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग करके प्रभावित क्षेत्रों की विस्तृत मैपिंग की जाएगी।

केरल में भू‑स्लाइड की पृष्ठभूमि

केरल ने पिछले कुछ वर्षों में कई बार भारी वर्षा के कारण भू‑स्लाइड का सामना किया है। 2018 में कोच्चि में हुई भयानक भू‑स्लाइड ने 100 से अधिक मौतें दर्ज की थीं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन में सुधार की मांग उठी थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि अनियंत्रित जल निकासी, वन कटाई और जलवायु परिवर्तन इस प्रकार की आपदाओं को बढ़ा रहे हैं। वायनाड की इस घटना ने भी इन कारकों को दोबारा उजागर किया है, जिससे सरकार को दीर्घकालिक रोकथाम उपायों की पुनः समीक्षा करनी पड़ेगी।

भविष्य की कार्रवाई और नीति दिशा

मुख्यमंत्री ने वायनाड में तत्काल राहत कार्यों के साथ-साथ दीर्घकालिक पुनर्बहाली योजना की घोषणा की। इसमें जल निकासी प्रणाली का आधुनिकीकरण, पहाड़ी क्षेत्रों में बाढ़ रोकथाम के लिए बायो‑इंजीनियरिंग, और स्थानीय समुदायों को जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं। सतीशन ने कहा कि यह आपदा एक चेतावनी है, और सरकार सतत विकास और पर्यावरणीय संरक्षण के लिए अधिक सख्त नियामक कदम उठाएगी।