वेस्ट बंगाल के बड़ूपुर में 11 साल की लड़की के बलात्कार‑हत्या में मुख्य आरोपी प्रभाष मोण्डोल को पुलिस एन्काउंटर में मार दिया गया। आरोपी को अपराध स्थल पर पुनःस्थापना के दौरान हथियार छीनने और गोली चलाने का आरोप है, जबकि राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ तीव्रता से बढ़ रही हैं।

वेस्ट बंगाल के दक्षिण 24 परगनाज़ जिला के बड़ूपुर में 11 साल की नाबालिग लड़की के बलात्कार‑हत्या के बाद मुख्य आरोपी प्रभाष मोण्डोल को मंगलवार रात पुलिस एन्काउंटर में मार दिया गया। पुलिस का कहना है कि मोण्डोल को अपराध स्थल पर पुनःस्थापना (re‑construction) के लिए ले जाया गया, जहाँ उसने एक पुलिस अधिकारी का हथियार छीन लिया और एक बार गोली चलाई, जिसके बाद पुलिस ने जवाबी गोलीबारी की। मोण्डोल को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ वह मृत घोषित किया गया।

घटना का क्रम और एन्काउंटर की परिस्थितियाँ

एन्काउंटर स्थल, जहाँ मोण्डोल को गोली मारी गई, लड़की के शव के मिलने वाले तालाब से केवल 100 मीटर दूर था। आधी रात के करीब 12:45 बजे मोण्डोल को उस स्थान पर ले जाया गया, जब बारिश हो रही थी और माहौल अंधेरा था। पुलिस ने बताया कि लीडिंग ऑफिसर रॉनी सारकार का सर्विस हथियार छीन लिया गया, जिससे मोण्डोल ने एक बार गोली चलाई। पुलिस ने तुरंत जवाब दिया, जिससे मोण्डोल घायल हुआ और बाद में वह मृत घोषित हुआ।

पृष्ठभूमि: बलात्कार‑हत्या और उसके बाद की प्रतिक्रिया

गिरावट की घटना रविवार को बड़ूपुर के एक तालाब में मिली थी, जहाँ लड़की के शरीर की लाश मिली थी। पोस्ट‑मॉर्टम रिपोर्ट ने पुष्टि की कि उस पर यौन शोषण हुआ था। इस घातक अपराध के बाद पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया और एक छह सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) ने मामले की जाँच शुरू की। मोण्डोल के साथ अन्य दो आरोपी – आनंदा सरदार और दिवाकर सरदार – को भी गिरफ्तार किया गया था, जबकि कबीर मोल्ला को बासीरहाट में गिरफ़्तार किया गया।

राजनीतिक और सामाजिक जलन

बड़ूपुर में इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने एक आरोपी को लिंचिंग कर मार दिया, जिसे बाद में राज्य के मुख्यमंत्री सुवेन्दु अधिकारि ने निर्दोष बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विरोध प्रदर्शन में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले 200‑अधिक लोगों की पहचान हो गई है और उन पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पुलिस को 72 घंटे में विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश भी दिया।

विरोधी पक्ष की आवाज़ें

त्रिनमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने बड़ूपुर में मोण्डोल की एन्काउंटर पर “जंगल कानून” का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना की। वहीं, बंगाल बीजीपी के प्रमुख सामिक भट्टाचार्य ने इस कदम को भाजपा के चुनावी वादे “भौँ (भय) हटाओ, भरोसा (भरोसा) बढ़ाओ” के अनुरूप बताया। इस प्रकार, इस केस ने राज्य‑स्तर की राजनीति में भी तीखी बहस को जन्म दिया है।

भविष्य की दिशा और न्याय की मांग

न्याय की मांग करने वाले माता-पिता और सामाजिक कार्यकर्ता अब इस बात की निगरानी कर रहे हैं कि क्या एन्काउंटर की प्रक्रिया वैध थी या यह मौक़ा न्याय से बचने का साधन बना। मानवाधिकार संगठनों ने इस तरह की एन्काउंटर की पारदर्शिता और जांच की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।