भारत सरकार ने एआई-जनरेटेड डीपफेक और फर्जी सामग्री के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। अब सोशल मीडिया कंपनियों को आपत्तिजनक कंटेंट को महज कुछ घंटों के भीतर हटाना होगा।

मुख्य बातें

  • सरकार ने एआई-जनरेटेड डीपफेक और फर्जी कंटेंट के खिलाफ नए सख्त नियम जारी किए हैं।
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अब आपत्तिजनक सामग्री को 2 से 3 घंटे के भीतर हटाना होगा।
  • गलत सूचना फैलाने वाली एआई सामग्री पर अब कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए, केंद्र सरकार ने डिजिटल सुरक्षा को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई व्यक्ति AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का उपयोग करके फर्जी फोटो, वीडियो या ऑडियो बनाकर समाज में झूठ फैलाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्लेटफॉर्म्स की बढ़ी जिम्मेदारी

नए दिशा-निर्देशों के तहत, अब सोशल मीडिया कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही काफी बढ़ गई है। सरकार ने संवेदनशील सामग्री को हटाने की समय-सीमा (Time-limit) को घटाकर 2 से 3 घंटे कर दिया है। यदि कोई प्लेटफॉर्म डीपफेक या भ्रामक सामग्री को समय पर नहीं हटाता है, तो उसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि डीपफेक तकनीक का उपयोग चुनाव, व्यक्तिगत छवि खराब करने और दंगे भड़काने के लिए किया जा रहा है। बिना किसी नियंत्रण के, एआई द्वारा निर्मित झूठ लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

एआई का अनियंत्रित उपयोग डिजिटल लोकतंत्र के लिए एक अस्तित्वगत खतरा है, जिसे केवल सख्त नियमों और तकनीकी निगरानी से ही रोका जा सकता है।

ऐतिहासिक रूप से, इंटरनेट पर सामग्री हटाने की प्रक्रिया काफी धीमी रही है, जिससे फर्जी खबरें जंगल की आग की तरह फैल जाती थीं। नए नियमों का उद्देश्य इस 'डिजिटल गैप' को भरना है।

क्या आप जानते हैं?: डीपफेक तकनीक 'जेनरेटिव एडवरसैरियल नेटवर्क' (GANs) का उपयोग करती है, जहाँ दो एआई सिस्टम एक-दूसरे को चुनौती देकर अत्यधिक वास्तविक दिखने वाली सामग्री बनाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. डीपफेक क्या है?
डीपफेक एआई का एक रूप है जो किसी व्यक्ति के चेहरे या आवाज को दूसरे व्यक्ति के शरीर या आवाज पर इतनी सटीकता से लगा देता है कि असली और नकली में अंतर करना मुश्किल हो जाता है।

2. क्या सोशल मीडिया कंपनियां नियमों का पालन करेंगी?
सरकार ने सख्त चेतावनी दी है, लेकिन तकनीकी दिग्गजों द्वारा इन नियमों के पूर्ण अनुपालन को लेकर अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं।