अकोला पश्चिम से कांग्रेस विधायक साजिद खान पठान को बिश्नोई गैंग द्वारा दो बार जानलेवा धमकी मिली। राज्य सरकार ने उनकी सुरक्षा को Y+ श्रेणी तक बढ़ा दी, जिससे 24 घंटे सशस्त्र गश्त सुनिश्चित होगी।
महाराष्ट्र के अकोला पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक साजिद खान पठान को कुख्यात बिश्नोई गैंग की ओर से दो बार जान से मारने की गंभीर धमकी मिली, जिसके बाद राज्य गृह विभाग ने तुरंत सुरक्षा स्तर को Y+ तक अपग्रेड किया। यह कदम प्रदेश में राजनीतिक हिंसा को रोकने और विधायक की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
धमकियों की क्रमबद्धता और पृष्ठभूमि
पहली धमकी फरवरी 2026 में आई, जब अज्ञात व्यक्तियों ने फोन पर रंगदारी की मांग की और भुगतान न करने पर विधायक की हत्या की चेतावनी दी। दो महीने बाद, जुलाई में, उसी समूह ने एक कांग्रेस नगरसेवक के मोबाइल पर फिर से वही धमकी भेजी, जिसमें साजिद खान पठान को मारने की फिर से स्पष्ट चेतावनी दी गई। यह दोहराव न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालता है, बल्कि स्थानीय राजनीति में भय और अस्थिरता का माहौल भी बनाता है।
विधानसभा में तीखी बहस
धमकियों की रिपोर्ट के बाद महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में तीखी बहस छिड़ गई। विपक्षी दलों ने तुरंत सरकार से सुरक्षा प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आग्रह किया। कई सांसदों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में उठाया, यह संकेत देते हुए कि राजनीतिक प्रतिनिधियों को किसी भी प्रकार के हिंसक दमन से बचाया जाना चाहिए।
Y+ सुरक्षा व्यवस्था का विस्तार
Y+ सुरक्षा के तहत विधायक के साथ 24 घंटे सशस्त्र पुलिसकर्मियों की निरंतर तैनाती रहेगी। अकोला पुलिस ने विशेष एस्कॉर्ट वैन, गनमैन और एक विशेष सुरक्षा दल को नियुक्त किया है, जो विधायक के घर, कार्यालय और सार्वजनिक कार्यक्रमों में निरंतर निगरानी करेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य न केवल तत्काल खतरे को रोकना है, बल्कि संभावित भविष्य के हमलों को भी निरुत्साहित करना है।
जाँच और भविष्य की संभावनाएँ
अकोला पुलिस ने अभी तक धमकी देने वालों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है, परंतु उन्होंने बताया कि मामले की गहन जाँच चल रही है और सभी उपलब्ध तकनीकी साधनों का उपयोग किया जाएगा। सुरक्षा एजेंसियों ने कहा कि वे इस प्रकार के संगठित अपराधी नेटवर्क को तोड़ने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग करेंगे। यदि इस जाँच में सफलतापूर्वक ठहराव नहीं हुआ, तो यह प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता को और बढ़ा सकता है।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजनैतिक प्रतिनिधियों को सुरक्षा के उच्चतम मानकों की आवश्यकता है, विशेषकर जब वे स्थानीय स्तर पर संगठित अपराध के प्रत्यक्ष लक्ष्य बनते हैं।