सिरंगम रेलवे स्टेशन पर चार्लापल्ली‑तिरुची एक्सप्रेस के नियमितीकरण के बाद एक उत्सवपूर्ण स्वागत हुआ। लोकसभा सांसद दुरै वैको ने शॉल और मिठाइयाँ देकर ट्रेन चालक को सम्मानित किया और रेल मंत्री को धन्यवाद दिया।
सिरंगम रेलवे स्टेशन पर बुधवार शाम को चार्लापल्ली‑तिरुची एक्सप्रेस के नियमितीकरण के बाद एक भावनात्मक स्वागत आयोजित किया गया। इस समारोह की अध्यक्षता तिरुची लोकसभा सांसद दुरै वैको ने की, जिन्होंने शॉल पहनाकर ट्रेन के लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट को सम्मानित किया और मिठाइयाँ वितरित कीं।
पृष्ठभूमि और मांग
चार्लापल्ली‑तिरुची एक्सप्रेस पहले केवल साप्ताहिक विशेष ट्रेन के रूप में चलती थी, जिससे यात्रियों को टिकट उपलब्धता, समय‑सारिणी और किराए में असुविधा का सामना करना पड़ता था। विशेषकर तिरुपति, तिरुवनमलै और सिरंगम जैसे धार्मिक केंद्रों के माध्यम से यात्रा करने वाले भक्त, छात्र और चिकित्सा उपचार के लिए यात्रा करने वाले लोग इस सेवा को नियमित रूप में चाहते थे। कई सालों से स्थानीय राजनीतिक दल और नागरिक समूह इस ट्रेन के नियमितीकरण की मांग कर रहे थे।
राजनीतिक पहल और रेल मंत्रालय की प्रतिक्रिया
दुरै वैको ने कई बार रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और दक्षिण मध्य रेलवे के अधिकारियों को लिखित आवेदन किए। उनके निरंतर दबाव के बाद, दक्षिण मध्य रेलवे ने मई के अंत में घोषणा की कि यह ट्रेन दोनों दिशाओं में साप्ताहिक विशेष से नियमित सेवा में बदल दी जाएगी। नियमितीकरण 7 जुलाई से चार्लापल्ली से शुरू हुआ और 8 जुलाई से तिरुची जंक्शन से शुरू होने की योजना है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक प्रभाव
नियमित सेवा से न केवल यात्रियों की सुविधा में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय व्यापारियों, होटल उद्योग और छोटे उद्यमियों को भी आर्थिक लाभ मिलेगा। श्रद्धालु, छात्र और रोगी अब समय पर यात्रा कर सकेंगे, जिससे पर्यटन आय में वृद्धि की उम्मीद है। इसके अलावा, नियमित ट्रेन संचालन से रेलवे के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जो भविष्य में बुनियादी ढाँचे के सुधार में पुनः निवेश किया जा सकता है।
समारोह के मुख्य क्षण
ट्रेन के आगमन पर, दुरै वैको ने शॉल पहनाकर लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट को सम्मानित किया, जिससे कर्मचारियों के मनोबल में वृद्धि हुई। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “रेल मंत्री और रेलवे अधिकारियों का धन्यवाद, जिन्होंने हमारे लोगों की आवाज़ सुनी और इस ट्रेन को नियमित किया। यह कदम श्रद्धालुओं, छात्रों और व्यापारियों के लिए वरदान है।”
सिरंगम में इस स्वागत ने स्थानीय जनसंख्या की आशा और संतोष को स्पष्ट रूप से दिखाया, और यह दर्शाया कि उचित राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक सहयोग से सार्वजनिक सेवाओं में सुधार संभव है।