तमिलनाडु की नई सरकार ने महिला यात्रियों के लिए चल रही मुफ्त बस योजना का नाम 'महिला विदायल पयानम' से हटाकर 'मगलीर पयानम' कर दिया। यह बदलाव राजनीतिक पहचान मिटाने के इरादे पर सवाल उठाता है, जैसा कि थंगम थेनरासु ने कहा है।
दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में सार्वजनिक परिवहन को लेकर एक प्रमुख परिवर्तन देखा गया है। 7 मई, 2021 को सत्ता में आए एम.के. स्टालिन की डीएमके सरकार ने महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा का एक व्यापक प्रावधान लागू किया था, जिसे महिला विदायल पयानम कहा गया था। इस योजना के तहत 9,000 शहर बसों में से 7,300 सामान्य किराये वाली बसों पर महिलाओं को निशुल्क यात्रा का अधिकार मिला, और चेन्नई में ही लगभग 1,500 बसें इस सुविधा से लाभान्वित हो रही थीं।
नाम परिवर्तन की पृष्ठभूमि
वर्तमान टी.वी.के (तमिलनाडु विकास गठबंधन) सरकार ने इस योजना का नाम बदलकर मगलीर पयानम कर दिया। परिवर्तन का मुख्य कारण 'विदायल' शब्द को हटाना बताया गया, जिससे सभी सामान्य किराये वाली बसों पर एक समान पहचान बन सके। परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एमटीसी (मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन) की सभी शाखाओं को नई बोर्डिंग लगाने का आदेश दिया गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आलोचना
डेमोक्रेटिक पार्टी (डिएमके) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री थंगम थेनरासु ने इस बदलाव को केवल नाम बदलने के बाहर गहरी राजनीति के रूप में देख कर आलोचना की। उन्होंने ट्विटर (अब X) पर लिखा, "आप नाम तो बदल सकते हैं, पर इतिहास नहीं बदल सकते।" उनका तर्क था कि योजना का वास्तविक प्रभाव उसके नाम से नहीं, बल्कि महिलाओं के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों से मापा जाना चाहिए। थेनरासु ने कहा कि नाम बदलने में खर्च होने वाला समय और संसाधन नई योजनाओं और सेवाओं के विकास में निवेश किया जाना चाहिए।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
नाम परिवर्तन के बावजूद, योजना का मूल उद्देश्य — महिलाओं को सस्ती और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन प्रदान करना — बरकरार है। अनुसंधान से पता चलता है कि मुफ्त यात्रा ने महिलाओं की कार्यस्थल तक पहुंच, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच में उल्लेखनीय सुधार किया है। हालांकि, नाम बदलने से सार्वजनिक धारणा में भ्रम उत्पन्न हो सकता है, जिससे लाभार्थियों को योजना की जानकारी में कमी आ सकती है।
आगे का रास्ता
विशेषज्ञों का मानना है कि तमिलनाडु सरकार को योजना की कार्यक्षमता को मापने के लिए विस्तृत सर्वेक्षण करना चाहिए, साथ ही नई पहल जैसे इलेक्ट्रिक बसों का परिचय और सुरक्षा सुविधाओं को बढ़ावा देना चाहिए। यदि सही ढंग से लागू किया जाए, तो 'मगलीर पयानम' न केवल महिलाओं के लिए एक परिवहन साधन रहेगा, बल्कि लिंग समानता के दिशा में एक प्रमुख कदम बन सकता है।