केलकत्ता हाई कोर्ट ने TMC के सभी बैंक खातों पर पुलिस के प्रतिबंध को हटाया, परंतु प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा तीन खातों को लागू पब्लिक मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 17 के तहत जमानत जारी रखी गई है। यह निर्णय पार्टी के भीतर फूट और वित्तीय जांच को और जटिल बनाता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- केलकत्ता हाई कोर्ट ने सभी TMC खातों पर पुलिस के प्रतिबंध को हटाया
- ED ने तीन खातों को PMLA धारा 17 के तहत जमानत में रखा
- जमा राशि लगभग 440 करोड़ रुपये, जिसमें 160 करोड़ धोखाधड़ी का आरोप
नई दिल्ली – प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने त्रिनामूल कांग्रेस (TMC) के तीन बैंक खातों को सार्वजनिक धन शोधन अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत जमानत में रखा है, जबकि केलकत्ता हाई कोर्ट ने कोलकाता पुलिस द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को हटाया। यह दो अलग‑अलग न्यायिक कार्यवाही के बीच का अंतर दर्शाता है, जहाँ ED ने 440 करोड़ रुपये की कुल राशि वाले 18 खातों में से केवल तीन को जमानत में रखा है।
पृष्ठभूमि और कानूनी ढांचा
PMLA की धारा 17 निदेशालय को तलाशी, जप्ती और संपत्ति कब्जा करने की शक्ति देती है, जबकि धारा 17(1A) विशेष रूप से संपत्ति के जब्ती को सशक्त बनाती है। इन प्रावधानों के तहत ED ने यह दावा किया है कि TMC के कुछ सदस्यों ने 160 करोड़ रुपये को एयरोस्पेस कंपनी के माध्यम से विमान और हेलिकॉप्टर खरीदने के लिये धोखा दिया। यह धन Carewell Aviation India और उसके सहयोगी संस्थानों को स्थानांतरित किया गया था।
ED की विस्तृत जांच
ED ने बताया कि अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच लगभग 82.9 करोड़ रुपये को नई स्थापित इकाई में भेजा गया था ताकि Embraer Legacy 600 विमान और Agusta 109 Grand New हेलिकॉप्टर खरीदा जा सके। अतिरिक्त रूप से, कयमन द्वीप स्थित एक इकाई से $1.7 मिलियन का बिना सुरक्षा वाला ऋण भी इस खरीद में उपयोग किया गया है। यह वित्तीय प्रवाह जांच के तहत कयमन द्वीप के कनेक्शन को भी उजागर करता है।
राजनीतिक प्रभाव और आगे की कार्यवाही
केलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश मूलतः TMC के दो फड़के समूहों – मुख्य दल और रिताब्राता बनर्जी के नेतृत्व वाली ब्रेकअवे समूह – के बीच खाते संचालन को प्रतिबंधित करने वाली पुलिस की कार्रवाई को समाप्त करता है। हालाँकि, ED ने अपनी जमानत को बरकरार रखा है, क्योंकि यह उनकी जांच के मौलिक परिणामों से संबंधित है। ब्रेकअवे समूह ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) द्वारा चुनौती देने और ED को मामले में पक्ष बनवाने की घोषणा की है।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि सुप्रीम कोर्ट ED को पक्ष बनाता है, तो यह TMC के वित्तीय लेन‑देन की पूरी जांच को पुनः खोल सकता है, जिससे पार्टी के भीतर मौजूद आंतरिक विभाजन और बढ़ेगा। साथ ही, यह न्यायिक प्रक्रिया भारत में राजनीतिक वित्तीय मामलों में ED की भूमिका और उसकी सीमाओं को भी परिभाषित कर सकती है।