अध्यक्ष दल के उप नेता अरविंद बेल्लड ने कहा कि कांग्रेस राज्य में चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) को रोका जा रहा है और राज्य सरकार को स्थायी निवास प्रमाणपत्र (PRC) जारी करने का अधिकार नहीं है। यह बयान कर्नाटक की नागरिकता‑सुरक्षा मुद्दे को और जटिल बनाता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कांग्रेस पर कर्नाटक में विशेष गहन संशोधन (SIR) में बाधा डालने का आरोप।
- राज्य सरकार को स्थायी निवास प्रमाणपत्र (PRC) जारी करने का कोई अधिकार नहीं, यह विरोधी दल का दावा।
- SIR के परिणामों से बंगालादेश और पाकिस्तान के संभावित घुसपैठियों की संख्या उजागर होने की संभावना।
हब्बल्ली में शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्नाटक विधानसभा के उप विपक्ष नेता अरविंद बेल्लड ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेन्सिव रीविजन (SIR) प्रक्रिया में जानबूझकर बाधाएँ डाल रही है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार द्वारा जारी किए जा रहे स्थायी निवास प्रमाणपत्र (PRC) का कोई वैध कानूनी आधार नहीं है, क्योंकि नागरिकता का निर्धारण केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।
पृष्ठभूमि और SIR का महत्व
स्पेशल इंटेन्सिव रीविजन, यानी SIR, कर्नाटक सरकार की एक व्यापक जनगणना‑आधारित पहल है, जिसका उद्देश्य जनसंख्या का सटीक आंकड़ा तैयार करना और विशेष रूप से बैनर‑बस्तियों में घुसपैठियों की पहचान करना है। इस प्रक्रिया के तहत घर‑घर जाकर डेटा एकत्र किया जा रहा है, जिसे भविष्य में सुरक्षा‑नीति और सामाजिक‑कल्याण योजनाओं में उपयोग किया जाएगा।
कांग्रेस का विरोध और PRC विवाद
बेल्लड ने आरोप लगाया कि कांग्रेस‑नियंत्रित अधिकारियों ने SIR के फॉर्मों को मस्जिदों, चर्चों और कांग्रेस विधायक की आवासीय जगहों पर वितरित कर प्रक्रिया को कमजोर किया है। उनका तर्क है कि इस तरह से डेटा संग्रह का मूल उद्देश्य—घुसपैठियों की पहचान—बिलकुल ख़तम हो जाता है। उसी दौरान, राज्य सरकार द्वारा जारी किए जा रहे PRC को उन्होंने “अनधिकृत” कहा, यह कहते हुए कि केवल केंद्र सरकार ही नागरिकता‑संबंधी प्रमाणपत्र जारी कर सकती है।
राजनीतिक प्रतिच्छाया
बेल्लड ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवाकुमार के व्यक्तिगत व्यवहार का भी उल्लेख किया, यह कहकर कि वे सिर पर विबुधी और कुमकुम लगाते हैं, परन्तु उनके मन में मुस्लिम समुदाय के प्रति पूर्वाग्रह बना रहता है। उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि वह घुसपैठियों के पक्ष में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में खड़े हों।
अन्य विपक्षी आवाज़ें
हब्बल्ली‑धरवाड़ सेंटर के MLA महेश टेंगीनाकाई ने भी कांग्रेस‑नेतृत्व वाली सरकार पर SIR प्रक्रिया में हेरफेर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में PRC जारी करने से घुसपैठियों को संरक्षण मिल रहा है और तुरंत इस परिपत्र को वापस लेना चाहिए। इसके अलावा, गृह मंत्री प्रियांक खरगे को RSS के मुद्दे पर बात करने के बजाय घुसपैठियों की पहचान और निर्वासन पर ध्यान देना चाहिए, यह बात भी उन्होंने उठाई।
इन सभी बयानों के बीच कर्नाटक में नागरिकता‑सुरक्षा मुद्दा संवेदनशील बना हुआ है, क्योंकि यह राज्य की जनसंख्या संरचना, सामाजिक सामंजस्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रमुख प्रश्नों को छूता है। यदि SIR के परिणाम वास्तव में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी‑पाकिस्तानी प्रवासियों को उजागर करते हैं, तो यह न केवल राज्य सरकार बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों को भी पुनः विचार करने पर मजबूर कर सकता है।