कर्नाटक के बिदाड़ी टाउनशिप प्रोजेक्ट के तहत 7,400 एकड़ भूमि अधिग्रहण के विरोध में मंडालहली गांव के ग्रामीणों ने सर्वे अधिकारी दल को पत्थर और झाड़ू से बाहर निकाल दिया। यह विरोध जेडी(एस) की आलोचना और सरकार की भूमि नीति पर सवाल उठाता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- बिदाड़ी टाउनशिप परियोजना के लिए 7,400 एकड़ भूमि अधिग्रहण की योजना।
- मंदालहली गांव के ग्रामीणों ने सर्वे अधिकारियों को पत्थर और झाड़ू से निकाला।
- जेडी(एस) ने सर्वे प्रक्रिया को ‘बिना सूचना’ होने का आरोप लगाते हुए विरोध किया।
कर्नाटक के बेंगलुरु दक्षिण जिले के मंदालहली गांव में मंगलवार को एक तीव्र विरोध प्रदर्शन हुआ, जहाँ स्थानीय किसानों ने बिदाड़ी टाउनशिप परियोजना के लिए जारी सर्वेक्षण को रोकने हेतु सरकारी अधिकारियों को पत्थर और झाड़ू से धकेल दिया। यह टाउनशिप, जिसे मुख्यमंत्री डी.के. शिवाकुमार का ‘पेट प्रोजेक्ट’ कहा जाता है, नौ गाँवों में कुल 7,400 एकड़ (लगभग 2,994 हेक्टेयर) भूमि को अधिग्रहित करने की योजना रखता है।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
बिदाड़ी टाउनशिप परियोजना का प्रारंभिक अधिसूचना मार्च 2025 में जारी किया गया था, जिससे किसानों और स्थानीय समुदायों में व्यापक असंतोष उत्पन्न हुआ। कर्नाटक में भूमि अधिग्रहण के पिछले मामलों—जैसे 2017 का ‘जुहू टाउनशिप’—में अक्सर पर्याप्त पुनर्विचार और उचित पुनर्व्यवस्थापन की कमी को लेकर विरोध देखा गया था। इस बार भी ग्रामीणों को पर्याप्त सूचना नहीं मिलने के कारण तनाव बढ़ा, जिससे इस प्रकार का प्रत्यक्ष विरोध हुआ।
प्रदर्शन की घटना
जैसे ही सर्वेक्षण दल ने जॉइंट मेज़रमेंट कमिटी (JMC) के प्रतिनिधियों को क्षेत्र में प्रवेश किया, ग्रामीणों ने मुख्य मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। फिर महिलाएँ झाड़ू और पत्थर लेकर रस्ते पर उतर आईं, और अधिकारी वाहन को भी बारी-बारी से पत्थर मारने लगे। कई वीडियो में दिखाया गया कि महिलाओं ने सर्वे कार्मिकों को झाड़ू से मारते हुए उन्हें जगह से हटाने की कोशिश की। अंततः अधिकारियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ा और वे जल्दी‑जल्दी स्थल छोड़ कर लौट गए।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
विरोधी दल जेडी(एस) ने इस घटना को ‘बिना सूचना के बलपूर्वक सर्वे’ कह कर निंदा की। जेडी(एस) के युवा प्रमुख निखिल कुमारास्वामी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि सरकार को किसानों को तुरंत रिहा करना चाहिए और बिदाड़ी टाउनशिप परियोजना को पूरी तरह से बंद करना चाहिए। इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि इस मुद्दे ने राज्य‑स्तर की राजनीति में भी नई लहर खड़ी कर दी है।
भविष्य की संभावनाएँ और प्रभाव
यदि सरकार इस विरोध को शांत नहीं करती, तो बिदाड़ी टाउनशिप की कार्यवाही में आगे देरी और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, इस प्रकार के विरोध से कर्नाटक के शहरी विकास मॉडल पर पुनर्विचार की आवश्यकता भी उजागर होती है, जहाँ ग्रामीण समुदायों की भागीदारी और पुनर्व्यवस्थापन के उचित प्रावधानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।