मोदी सरकार ने मानसून सत्र में महिलाओं के आरक्षण बिल को पारित करने के लिए दो‑तीहाई बहुमत जुटाने की रणनीति तेज़ कर दी है। डेमोक्रेटिक पार्टी (DMK) और राष्ट्रीय कांग्रेस (NCP‑SP) जैसे विपक्षी दलों से समर्थन या कम से कम निरंकुशता की आशा की जा रही है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- बिल को दो‑तीहाई बहुमत चाहिए
- विपक्षी दलों से समर्थन या निरंकुशता की तलाश
- डिलिमिटेशन बिल पर भी तनाव जारी
मनसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई से होने वाली है, और नरेंद्र मोदी सरकार ने इस अवसर का उपयोग करके महिलाओं के आरक्षण को 2029 तक बढ़ाने के उद्देश्य से एक नया संवैधानिक संशोधन बिल पेश करने की तैयारी की है। यह बिल, जो पिछले अप्रैल के विशेष सत्र में निचली सभा में अस्वीकृत हुआ था, अब दो‑तीहाई बहुमत की गारंटी के बाद ही प्रस्तुत किया जाएगा।
संभव समर्थन की खोज
बीजेपी ने पहले ही ट्रिनामूल कांग्रेस के 20 विद्रोही सांसदों और शिवसेना (UBT) के छह सांसदों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश की है, जिससे लोकसभा में उसकी गिनती 293 से बढ़कर 329 हो सकती है। हालांकि, 360 की दो‑तीहाई सीमा तक पहुँचने के लिए यह पर्याप्त नहीं है। इसलिए, सरकार अब डेमोक्रेटिक पार्टी (DMK) और राष्ट्रीय कांग्रेस (NCP‑SP) जैसे छोटे विपक्षी दलों से समर्थन या कम से कम निरंकुशता की आशा कर रही है।
DMK की स्थिति
DMK ने अभी तक अपने निर्णय को अंतिम रूप नहीं दिया है, लेकिन वह सरकार के साथ “मध्यम मार्ग” खोजने की इच्छा जताती है। पार्टी ने कहा है कि तमिलनाडु के हितों की रक्षा आवश्यक है और जनसंख्या नियंत्रण के सफल उपायों के कारण राज्य को दंडित नहीं किया जाना चाहिए। यदि DMK निरंकुशता चुनता है, तो यह सरकार को आवश्यक अंक प्रदान कर सकता है, परंतु पूर्ण समर्थन की संभावना अभी अनिश्चित है।
विपक्षी दलों के साथ संवाद
बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि वे विपक्षी दलों के क्षेत्रीय नेताओं और व्यक्तिगत सांसदों से लगातार संपर्क में हैं, जिसमें समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के कुछ सदस्य भी शामिल हैं। पार्टी ने कहा कि वह केवल तभी बिल पेश करेगी जब पर्याप्त संख्या सुनिश्चित हो, ताकि कोई जोखिम न उठाना पड़े।
डिलिमिटेशन बिल का असर
साथ ही, लोकसभा के सदस्यों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 850 करने वाले डिलिमिटेशन बिल पर भी तीखी बहस चल रही है। दक्षिणी राज्यों, विशेषकर तमिलनाडु, को इस प्रक्रिया से प्रतिनिधित्व में कमी का डर है, जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। इस पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने स्पष्ट रूप से विरोध जताया है, और यह संदेश DMK के लिए एक रणनीतिक हथियार बन सकता है।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि सरकार को दो‑तीहाई बहुमत मिल जाता है, तो महिलाओं के आरक्षण और डिलिमिटेशन दोनों बिलों को एक साथ पारित करने की संभावना बढ़ जाएगी। लेकिन विपक्षी दलों की असहमति, विशेषकर DMK और NCP‑SP की अनिश्चित स्थिति, इस प्रक्रिया को जटिल बना रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह सत्र भारतीय संसद की शक्ति संतुलन पर एक महत्वपूर्ण परीक्षा होगी।