कर्नाटक सरकार ने बिड़ाड़ी टाउनशिप परियोजना की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया है, जबकि किसानों के निरंतर विरोध से मामला जटिल हो रहा है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवाकुमार ने कहा कि यह पैनल कानूनी, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं का मूल्यांकन करेगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • बिड़ाड़ी टाउनशिप योजना को लेकर किसानों का व्यापक विरोध
  • सरकार ने परियोजना के प्रभावों की समीक्षा हेतु समिति गठित की
  • निर्णय लेने से पहले कानूनी, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं का विश्लेषण किया जाएगा

कर्नाटक के बिड़ाड़ी में प्रस्तावित टाउनशिप योजना ने पिछले कुछ महीनों में राज्य के सबसे बड़े कृषि विरोधों में से एक को जन्म दिया है। इस परियोजना का उद्देश्य 5,000 से अधिक घरों, वाणिज्यिक क्षेत्रों और सामाजिक बुनियादी ढाँचे की रचना करना था, लेकिन भूमि अधिग्रहण के तरीके और पुनर्स्थापन उपायों को लेकर स्थानीय किसानों ने तीव्र असहयोग किया।

पृष्ठभूमि और इतिहास

बिड़ाड़ी, जो बेंगलुरु के दक्षिण‑पूर्व में स्थित एक तेजी से विकसित होते शहर के रूप में जाना जाता है, पिछले दो दशकों में औद्योगिक वृद्धि का केंद्र रहा है। 2000 के दशक के शुरुआती चरण में, कई औद्योगिक पार्क स्थापित किए गए, जिससे रोजगार में वृद्धि हुई। लेकिन 2024 में सरकार द्वारा प्रस्तावित टाउनशिप योजना ने मौजूदा कृषि भूमि को बड़े पैमाने पर अधिग्रहित करने की योजना बनाई, जिससे किसानों को अपने पारंपरिक उपजाऊ खेतों से विस्थापित होने का खतरा उत्पन्न हुआ।

विरोध के मुख्य कारण

किसानों ने मुख्यतः तीन बिंदुओं पर आपत्ति जताई: प्रथम, पर्याप्त पुनर्स्थापन और वैधानिक मुआवजा न होना; द्वितीय, जल संसाधन और पर्यावरणीय प्रभाव का अपर्याप्त अध्ययन; तथा तृतीय, स्थानीय सामाजिक संरचना में संभावित व्यत्यय। इन चिंताओं को लेकर कई प्रमुख किसान संघों ने बड़े पैमाने पर धरने और मार्च आयोजित किए, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के मीडिया का ध्यान भी आकर्षित हुआ।

सरकारी प्रतिक्रिया और समिति का गठन

मुख्यमंत्री डी.के. शिवाकुमार ने 15 जुलाई, 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि एक स्वतंत्र समिति बनाई जाएगी, जो परियोजना के कानूनी, सामाजिक और आर्थिक प्रभावों की गहन समीक्षा करेगी। इस समिति में भूमि कानून के विशेषज्ञ, पर्यावरण वैज्ञानिक, और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होंगे। उनका लक्ष्य है कि सभी पक्षों की आवाज़ को सुना जाए और संभावित समाधान खोजे जाएँ, जैसे वैकल्पिक भूमि चयन या बेहतर पुनर्स्थापन पैकेज।

भविष्य की संभावनाएँ

यदि समिति की रिपोर्ट सकारात्मक आती है, तो सरकार टाउनशिप योजना को आगे बढ़ा सकती है, जिससे बिड़ाड़ी में बुनियादी ढाँचा और आवासीय सुविधाएँ सुधरेंगी। हालाँकि, यदि रिपोर्ट में गंभीर मुद्दे उजागर होते हैं, तो योजना को पुनः संशोधित या रद्द किया जा सकता है, जिससे किसानों को अधिक सुरक्षा मिलेगी। इस निर्णय का प्रभाव न केवल कर्नाटक की राजस्व योजना पर, बल्कि पूरे देश में समान परियोजनाओं के लिये एक मिसाल स्थापित कर सकता है।