अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में पुलिस ने 40 दिनों में 70 बार चोरी की पुष्टि की। अब मंदिर प्रशासन ने चोरी रोकने के लिए गिनती प्रणाली को एक ही शिफ्ट में बदल दिया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 40 दिनों में 70 बार चढ़ावा चोरी की रिपोर्ट मिली।
  • चोरी मुख्य रूप से शाम की दूसरी शिफ्ट में हुई।
  • मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला ने 50 से अधिक बार चोरी में भाग लिया।
  • मंदिर प्रशासन ने गिनती को एक ही शिफ्ट (सुबह 9‑शाम 6) में बदल दिया।

अयोध्या में स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, जो धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से अत्यधिक महत्व रखता है, में हाल ही में चढ़ावा (दान) चोरी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। पुलिस द्वारा किए गए पूछताछ के अनुसार, केवल 40 दिनों के भीतर 70 अलग‑अलग घटनाओं में चढ़ावे की रकम निकाली गई, जिससे भक्तों में गहरा आशंकाजनक माहौल बन गया।

घटना की पृष्ठभूमि और जांच की दिशा

राम मंदिर में चढ़ावा आम तौर पर दो शिफ्टों में गिना जाता था – सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक पहली शिफ्ट और दोपहर 2 बजे से रात 9 बजे तक दूसरी शिफ्ट। पुलिस ने बताया कि सभी चोरी की रिपोर्टें केवल दूसरी (शाम) शिफ्ट में दर्ज हुईं। मुख्य संदिग्धों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे शामिल हैं। विशेष रूप से शुक्ला पर 50 से अधिक बार चोरी का आरोप है, जबकि कई दिनों में एक ही दिन दो‑तीन बार चोरी की कोशिश की गई।

परिवर्तित काउंटिंग सिस्टम

जांच के परिणामस्वरूप मंदिर प्रबंधन ने त्वरित कदम उठाते हुए गिनती प्रणाली में बदलाव किया। अब चढ़ावा केवल एक शिफ्ट में, सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक गिना जाएगा। यह कदम चोरी के जोखिम को कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रशासन ने बताया कि नई प्रणाली में सभी दान की रसीदें डिजिटल रूप में रिकॉर्ड की जाएँगी और प्रत्येक कर्मचारी को स्वतंत्र रूप से निरीक्षण करने का अधिकार दिया गया है।

विशेषज्ञों की राय और संभावित प्रभाव

धार्मिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की चोरी न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि मंदिर की विश्वसनीयता को भी धूमिल करती है। उन्होंने कहा कि डिजिटल ट्रैकिंग, ऑडिटिंग और बाहरी निरीक्षण बोर्ड की स्थापना से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। साथ ही, स्थानीय प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जांच पूरी तरह से पारदर्शी हो और सभी आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया में लाया जाए।

आगे की कार्रवाई

पुलिस वर्तमान में सभी प्राप्त तथ्यों को अन्य सबूतों से मिलान कर रही है और अतिरिक्त दो आरोपियों को रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। साथ ही, विशेष जांच टीम (SIT) को अयोध्या में ही रहकर पूरी जाँच पूरी करने का निर्देश दिया गया है। इस मामले की प्रगति को देखते हुए, मंदिर के प्रबंधन ने सुरक्षा को सुदृढ़ करने, वीआईपी पास की जांच और कैमरा कवरेज बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा है।

इस बड़े खुलासे के बाद, भक्तों और सामाजिक संगठनों ने पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है, जिससे भविष्य में दान प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बन सके।