भारत के मुख्य कोच अमोल मुजुंदर ने यह सवाल उठाया कि 142 साल बाद भी लॉर्ड्स में महिला टेस्ट क्यों नहीं हुई। इस ऐतिहासिक खेल को लेकर उनके विचार और भारतीय क्रिकेट की दिशा पर गहरी चर्चा।
इंग्लैंड के प्रतिष्ठित लॉर्ड्स मैदान, जिसे अक्सर ‘क्रिकेट का घर’ कहा जाता है, ने 1884 में पहला पुरुष टेस्ट आयोजित किया। फिर भी 142 वर्षों के बाद, इस ऐतिहासिक स्थल पर पहली महिला टेस्ट का आयोजन अभी बाकी है। भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच अमोल मुजुंदर ने इस देरी पर गहरा आश्चर्य व्यक्त किया, यह सवाल उठाते हुए कि ऐसी प्रतीकात्मक जगह पर महिला क्रिकेट को इतना देर क्यों मिला।
लॉर्ड्स का इतिहास और महिला क्रिकेट की यात्रा
लॉर्ड्स ने अपने शुरुआती दशकों में कई यादगार टेस्ट मैचों की मेजबानी की, जिसमें डोन ब्रैडमैन, सर डॉन बर्न्स और सर इवान रॉबिन्सन जैसे दिग्गजों ने खेला। वहीं, महिला क्रिकेट की शुरुआत 1934 में इंग्लैंड में हुई, परन्तु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नियमित टेस्ट मैचों की व्यवस्था केवल हाल के दशकों में ही संभव हुई। भारत ने 2006 में अपनी पहली महिला टेस्ट खेली, परन्तु लॉर्ड्स में इस फॉर्मेट का अभाव हमेशा से एक ‘खाली जगह’ माना जाता रहा।
अमोल मुजुंदर की टिप्पणी और उसके पीछे की वजहें
मुजुंदर ने कहा, “जब लॉर्ड्स ने पुरुषों के लिए अपना पहला टेस्ट खेला, तब से ही हमें उम्मीद थी कि महिला क्रिकेट को भी समान मंच मिलेगा। 142 साल का अंतर न केवल सांख्यिकीय है, बल्कि यह लिंग समानता के संघर्ष का प्रतिबिंब भी है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस देरी से महिला खिलाड़ियों की प्रेरणा पर असर पड़ता है, क्योंकि लॉर्ड्स जैसे प्रतिष्ठित मैदान पर खेलना कई खिलाड़ियों का सपना होता है।
भारतीय महिला क्रिकेट की वर्तमान स्थिति
हाल के वर्षों में भारतीय महिला टीम ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं—2022 में एशिया कप जीत और 2023 में विश्व कप में क्वार्टर फ़ाइनल तक पहुंच। इस प्रगति के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर में टेस्ट फॉर्मेट की कमी, विशेषकर लॉर्ड्स जैसे प्रमुख स्थलों में, एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। कोच मुजुंदर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि टेस्ट क्रिकेट खिलाड़ियों की तकनीकी और मानसिक क्षमताओं को निखारता है, और इसे महिला खेल में पुनः स्थापित करना आवश्यक है।
भविष्य की संभावनाएं और संभावित प्रभाव
यदि लॉर्ड्स में महिला टेस्ट का आयोजन सफल होता है, तो यह न केवल भारतीय खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा मंच होगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर महिला क्रिकेट के विकास को गति देगा। इससे स्पॉन्सरशिप, मीडिया कवरेज और युवा प्रतिभाओं की भागीदारी में वृद्धि की उम्मीद है। साथ ही, यह कदम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड (ICC) को भी महिला टेस्ट को नियमित बनाने की दिशा में प्रोत्साहित करेगा।
सारांश में, अमोल मुजुंदर की टिप्पणी सिर्फ एक व्यक्तिगत आश्चर्य नहीं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के लिए एक स्पष्ट संदेश है—इतिहास की बड़ी धरोहरों में समानता और सम्मान की जगह बनानी चाहिए। लॉर्ड्स में महिला टेस्ट का आयोजन इस संदेश को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम हो सकता है।