नई दिल्ली में आयोजित विश्व जूनियर स्क्वैश व्यक्तिगत चैंपियनशिप के महिला फाइनल में विश्व नंबर 20 और शीर्ष वरीयता प्राप्त अनाहत सिंह ने मिस्र की रुकैया सलेम को सीधे सेटों में हराकर इतिहास रच दिया। यह जीत भारतीय स्क्वैश के लिए एक मील का पत्थर है।
मुख्य बिंदु
- अनाहत सिंह विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं।
- उन्होंने फाइनल में मिस्र की रुकैया सलेम को 11-3, 11-7, 11-9 से हराया।
- यह अनाहत का जूनियर सर्किट में आखिरी साल था और उन्होंने इस अवसर को भुनाया।
- यह जीत भारतीय स्क्वैश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।
नई दिल्ली: भारत की युवा सनसनी अनाहत सिंह ने शनिवार, 25 जुलाई 2026 को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया। नई दिल्ली में खेले गए फाइनल मुकाबले में, विश्व रैंकिंग में 20वें स्थान पर काबिज और शीर्ष वरीयता प्राप्त अनाहत ने मिस्र की रुकैया सलेम को 11-3, 11-7, और 11-9 के स्कोर से हराकर यह प्रतिष्ठित खिताब जीता। इस जीत के साथ, अनाहत विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं।
पिछले साल कांस्य पदक जीतने वाली अनाहत के लिए यह जीत 'दुनिया के बराबर' है। उन्होंने कहा, "यह मेरे लिए दुनिया के बराबर है। मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि मैं यह कर पाई हूँ।" 18 वर्षीय दिल्ली की खिलाड़ी ने आगे कहा, "पिछले चार सालों से मैं सेमीफाइनल और क्वार्टर फाइनल में हार रही थी। मैंने हमेशा कहा है कि यह टूर्नामेंट मेरे लिए एक अभिशाप जैसा रहा है, और मैं इसमें कभी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती थी।" यह जीत उनके लिए और भी खास है क्योंकि यह जूनियर सर्किट में उनका आखिरी साल था।
यह क्यों मायने रखता है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि अनाहत सिंह की यह जीत भारतीय स्क्वैश के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह न केवल देश में खेल की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है, बल्कि युवा खिलाड़ियों को भी बड़े मंच पर सफलता हासिल करने के लिए प्रेरित करेगा। यह दर्शाता है कि निरंतर कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष पर पहुंचना संभव है।
स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव, साइरस पोंचा ने इस जीत को 'भारतीय स्क्वैश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण' बताया। उन्होंने कहा, "अनाहत में महान ऊंचाइयों को छूने की क्षमता है।" उन्होंने स्वर्गीय श्री एन. रामाचंद्रन, एसआरएफआई संरक्षक और भारतीय स्क्वैश अकादमी के दूरदर्शी, के सपने का भी उल्लेख किया, जिनका सपना था कि भारत व्यक्तिगत स्पर्धाओं में विश्व चैंपियन तैयार करे। पोंचा ने कहा, "हमने यह युगल में हासिल किया था, लेकिन इसे एकल में दोहराना वास्तव में एक सपना सच होने जैसा है। यह अनाहत की कड़ी मेहनत और प्रयास का परिणाम है, लेकिन इसके पीछे पूरे देश का समर्थन भी रहा है।"
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- अनाहत सिंह की विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप में यह कौन सी जीत थी?
- इस जीत का भारतीय स्क्वैश पर क्या प्रभाव पड़ने की उम्मीद है?
"अनाहत सिंह की विश्व जूनियर खिताब जीत भारतीय खेल के लिए एक प्रेरणादायक क्षण है, जो युवा प्रतिभाओं के लिए नई राहें खोलती है।"