सशस्त्र बलों में ड्रोन का बढ़ता प्रयोग और उनके कम लागत वाले हथियारों ने पारम्परिक मिसाइल‑आधारित रक्षा को चुनौती दी है। यूक्रेन ने इंटरसेप्टर ड्रोन विकसित कर इस असंतुलन को संतुलित किया, जबकि भारत भी समान तकनीक को अपनाने की राह पर है। ये नई प्रणालियाँ किफायती सुरक्षा के नए मानक स्थापित कर रही हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- इंटरसेप्टर ड्रोन कम लागत वाले शत्रु ड्रोन को प्रभावी रूप से नष्ट कर सकते हैं।
- इन्हें मिशन के बाद पुनः उपयोग किया जा सकता है, जिससे कुल खर्च घटता है।
- भारत और यूक्रेन दोनों इन तकनीकों को अपने राष्ट्रीय रक्षा ढाँचे में एकीकृत कर रहे हैं।
ड्रोन का प्रयोग युद्धक्षेत्र में पहले कभी नहीं देखा गया स्तर पर बढ़ गया है। सस्ते लूपिंग म्यूनिशन (जैसे इरान के Shahed‑136) से लेकर उच्च‑स्तरीय जासूसी ड्रोन तक, ये बिना पायलट वाले विमान दुश्मन की निगरानी, हिटिंग और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने में माहिर हैं। पारम्परिक एयर डिफेंस प्रणाली, जो मुख्यतः महंगे मिसाइलों पर निर्भर रहती है, अब आर्थिक रूप से असमानता का सामना कर रही है—एक $30,000 का ड्रोन को $1 मिलियन से अधिक की मिसाइल से नष्ट करना, लागत‑प्रभावशीलता की दृष्टि से असहज है।
यूक्रेन की अभिनव प्रतिक्रिया
रूस‑यूक्रेन संघर्ष में, यूक्रेन ने इस समस्या का समाधान इंटरसेप्टर ड्रोन के विकास से निकाला। Sting और Bullet जैसे मॉडल काइनेटिक टकराव या विस्फोटक चार्ज के माध्यम से शत्रु ड्रोन को नष्ट करते हैं, साथ ही मिशन के बाद लैंडिंग करके पुनः उपयोग किए जा सकते हैं। यूक्रेनी कंपनियों का दावा है कि इन ड्रोन की हिट दर 80 % से अधिक है और ऑपरेटर को सिर्फ छह दिनों में प्रशिक्षित किया जा सकता है। इस गति और पुन: उपयोग क्षमता ने मिसाइल‑आधारित रक्षा के मुकाबले कुल खर्च को लगभग आधा कर दिया है।
जैमर और उनके सीमाएँ
ड्रोन‑जैमर, जो इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल द्वारा ड्रोन के संचार को बाधित करते हैं, एक और समाधान रहे हैं, परन्तु वे मित्र‑और‑शत्रु दोनों ड्रोन को ब्लॉक करते हैं, जिससे मित्रवर्गीय विमानों की कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है। इसके विपरीत, इंटरसेप्टर ड्रोन लक्ष्य‑विशिष्ट होते हैं और गैर‑सैन्य ड्रोन को सुरक्षित रूप से हटाने की संभावना प्रदान करते हैं।
भारत में समान पहलकदमियाँ
भारत में भी निजी एवं सरकारी कंपनियों ने इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। Stravex का Agni Strike, Veda Aeronautics का Veda Interceptor और Indrajaal का Zombee जैसी प्रणालियाँ विकसित हो रही हैं। ये सिस्टम किफायती, बहु‑उपयोगी और भारतीय रक्षा परिदृश्य में तेज़ी से एकीकृत होने की उम्मीद है।
भविष्य की संभावनाएँ
जैसे-जैसे ड्रोन तकनीक सस्ती और बहु‑कार्यात्मक हो रही है, इंटरसेप्टर ड्रोन का महत्व बढ़ेगा। लागत‑प्रभावी समाधान न केवल राष्ट्रीय रक्षा बजट को संतुलित करेंगे, बल्कि तेज़‑गति वाले, स्वायत्त या समूह‑आधारित ड्रोन खतरों को भी नियंत्रित करेंगे। इस बदलाव से भविष्य में एयर डिफेंस का परिदृश्य अधिक लचीला, पुनरावृत्तिपूर्ण और आर्थिक रूप से स्थायी होने की संभावना है।